Kisan Mahapanchayat: उच्चतम न्यायालय (SC)के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत तथा न्यायाधीश जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने जनहित याचिका संख्या 911/2025 में अंतरिम आदेश के द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य की सुनिश्चितता के आधार पर देश की दलहन उपजो को प्रोन्नत करने के लिए कृषि लागत एवं मूल्य आयोग कि उस अनुशंसा को प्रभावी बनाने का निर्देश दिया है, जिसमें देश के दलहन उत्पादो को प्रोत्साहन देने के लिए आयातित पीली मटर की दाल पर आयात शुल्क के पुनर्निर्धारण की आवश्यकता प्रतिपादित की है।
न्यूनतम समर्थन मूल्य की अनदेखा
भारत सरकार में गेहूं एवं चावल के स्थान पर दलहनों को प्रस्थापित करने की नीति को प्रभावी बनाने के लिए पहल की है, दूसरी ओर न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा को अनदेखा करते हुए पीली दाल के आयात पर आयात शुल्क शून्य कर दिया था, जिससे चना एवं अरहर जैसी दलहन उपजो के मूल्य घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे चले गये। इससे देश में उत्पादित दलहन उपजो का उत्पादक किसानों को सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य से भी वंचित होना पड़ रहा है, यह देश के दलहन उत्पादकों को हतोत्साहित करने का काम है।
आगामी सुनवाई 8 मई 2026
उच्चतम न्यायालय (SC)के इस अंतरिम आदेश में भारत सरकार को संबंधित सभी पक्षों की बैठक आयोजित कर उसके विचार विमर्श से उच्चतम न्यायालय को अवगत कराने का निर्देश दिया है, उसके उपरांत ही उच्चतम न्यायालय द्वारा आगामी सुनवाई के लिए 8 मई 2026 की तारीख नियुक्त की है। देश के किसानों की ओर से यह जनहित याचिका किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट द्वारा प्रस्तुत की गई है। उनकी ओर से देश के प्रसिद्ध वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण के साथ अधिवक्ता नेहा राठी, सौम्या कुमारी, काजल गिरी एवं प्रतीक यादव भी उपस्थित रहे। प्रत्यर्थीगण भारत सरकार एवं अन्य की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल वेंकटरमन, उनके सहायक गुरमीत सिंह मक्कड़,अमन झा, अश्वनीभारद्वाज एवं वरद किलोर उपस्थित रहे।



