Shankracharya : शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदिनाथ को चालीस दिन में हिन्दू होने का प्रमाण देने को कहा है। शंकराचार्य कहा कि मैंने अपने शंकराचार्य होने का प्रमाण दे दिया है। शंकराचार्य ने शुक्रवार को मीडिया से बात करते हुए उक्त बात कही। प्रयागराज माघ मेला प्रशासन और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच विवाद थम नहीं रहा है। मेला छोड़ने के बाद शंकराचार्य सरकार पर तीखे हमले कर रहे हैं। उन्होंने शुक्रवार को वाराणसी में कहा- मुझसे शंकराचार्य होने का प्रमाण पत्र तक मांगा गया। मैंने वह दे दिया। मेरे प्रमाण सच्चे थे, इसलिए उन्हें मानना पड़ा। अब प्रमाण मांगने का समय पीछे छूट गया है। अब मुख्यमंत्री को अपने हिंदू होने का प्रमाण देना चाहिए।
अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि मुख्यमंत्री और जगद्गुरु रामभद्राचार्य इस समय घेरा बनाकर गोहत्या बंदी की मांग करने वालों पर तरह-तरह के हमले कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत से होने वाले कुल गोमांस निर्यात का 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सा सिर्फ उत्तर प्रदेश से होता है। लगभग आधा निर्यात यूपी से हो रहा है। इसलिए तत्काल उत्तर प्रदेश से गोमांस का निर्यात रोका जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि या तो अपने हिंदू होने का प्रमाण दीजिए, नहीं तो यह भगवा चोला उतार दीजिए। 10-11 मार्च को लखनऊ में संत-महंत और आचार्य एकत्र होंगे। वहां तय किया जाएगा कि कौन हिंदू है, कौन हिंदू हृदय सम्राट है और किसे छद्म हिंदू या नकली हिंदू घोषित किया जाना चाहिए।
शंकराचार्य के आगे झुक गई यूपी सरकार
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के आगे यूपी सरकार झुक गई है अब प्रयागराज प्रशासन माफी मांगने को तैयार हो गया है। शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी योगीराज सरकार ने खुद इसकी पुष्टि की है।
जानकारी के अनुसार 28 जनवरी को शंकराचार्य के वाराणसी आने के बाद लखनऊ के दो बड़े अधिकारियों ने महाराज से संपर्क किया और पूर्णिमा पर माघ मेले में स-सम्मान स्नान कराने की बात कही। इस पर महाराजी ने दो शर्त रखी हैं।
जिम्मेदार माफी मांगे, लिखित माफीनामा दें और चारों शंकराचार्य का प्रोटोकॉल स्नान के लिए लागू किया जाए।
जानकारी मिली है कि योगीराज सरकार ने बताया- शासन के कुछ अधिकारी वाराणसी आएंगे। शंकराचार्य को लेकर प्रयागराज ले जाएंगे। उन्हें माघी पूर्णिमा पर संगम स्नान कराएंगे।
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सरकार क्यों बैकफुट पर आई
सूत्रों के मुताबिक, मुद्दे पर न सिर्फ संत समाज में, बल्कि सरकार के भीतर भी विरोध के स्वर उठने लगे थे। यूपी के उप मुख्यमंत्री केशव मौर्य लगातार शंकराचार्य का पक्ष ले रहे थे। उन्होंने यहां तक भी कह दिया था कि अगर कोई मुझसे कहेगा तो मैं शंकराचार्य के पास जाऊंगा।
लोगों के बीच भी व्यवहार को लेकर नाराजगी थी। 10 दिनों में मुद्दा कई बार ग् पर ट्रेंड करता रहा। बढ़ते दबाव के बीच सरकार पर्दे के पीछे बैकफुट पर जाती नजर आई, इसलिए लखनऊ में टॉप मोस्ट अफसरों को मैनेज करने की जिम्मेदारी दी गई। सरकार शंकराचार्य को स्नान कराकर मुद्दे को पूरी तरह से खत्म करना चाहती है, ताकि यह मुद्दा और तूल न पकड़े।
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