American Vice President : अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के H-1B वीजा धारकों को लेकर दिए गए बयान पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई है। वेंस ने विदेशी कुशल कर्मचारियों के संदर्भ में ‘Indentured Servants’ यानी ‘बंधुआ मजदूर’ शब्द का इस्तेमाल किया था। शुक्रवार को भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस टिप्पणी को अनुचित और बेहद अपमानजनक बताते हुए इसकी निंदा की। भारत ने स्पष्ट किया कि अमेरिका में काम करने वाले भारतीय पेशेवर वहां की अर्थव्यवस्था, तकनीकी विकास और इनोवेशन में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब अमेरिका की ट्रंप सरकार ने माइक्रोसॉफ्ट, इन्फोसिस, टीसीएस और विप्रो सहित आठ बड़ी टेक कंपनियों को रोजगार आधारित स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड से जुड़ी PERM प्रक्रिया से निलंबित करने का फैसला लिया है।
जेडी वेंस ने विदेशी कर्मचारियों को बताया ‘बंधुआ मजदूर’
8 अक्टूबर को वीजा धोखाधड़ी से संबंधित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बड़ी टेक कंपनियों की भर्ती नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ कंपनियां अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी करने के बावजूद विदेशों से कम लागत पर कर्मचारियों की भर्ती कर रही हैं। इसी दौरान उन्होंने विदेशी कर्मचारियों के लिए ‘Indentured Servants’ शब्द का इस्तेमाल किया। इस टिप्पणी को लेकर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। वेंस का कहना था कि अमेरिकी कंपनियों को स्थानीय कर्मचारियों को रोजगार देने में प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने विदेशी कर्मचारियों की भर्ती और अमेरिकी नागरिकों की नौकरियों के बीच संबंध को लेकर भी सवाल उठाए।
माइक्रोसॉफ्ट पर लगाए गंभीर आरोप, 6 हजार कर्मचारियों की छंटनी का मुद्दा उठाया
जेडी वेंस ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में माइक्रोसॉफ्ट का उदाहरण देते हुए कंपनी की भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि पिछले वर्ष माइक्रोसॉफ्ट ने लगभग 6,000 अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी की, जबकि इसी अवधि में कंपनी ने करीब 6,300 H-1B वीजा और लगभग 3,000 ग्रीन कार्ड का लाभ लिया। वेंस ने आरोप लगाया कि कंपनियां विदेशी कर्मचारियों की भर्ती को बढ़ावा देकर अमेरिकी श्रमिकों के हितों को प्रभावित कर रही हैं। हालांकि, ये आंकड़े और भर्ती संबंधी आरोप अमेरिकी उपराष्ट्रपति के दावों का हिस्सा हैं। इनसे यह स्वतः साबित नहीं होता कि छंटनी किए गए अमेरिकी कर्मचारियों की जगह सीधे विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त किया गया। माइक्रोसॉफ्ट ने अपनी भर्ती व्यवस्था का बचाव करते हुए कहा है कि उसकी अधिकांश अमेरिकी कार्यबल स्थानीय कर्मचारियों की है और बड़ी संख्या में H-1B आवेदन पहले से कार्यरत कर्मचारियों से संबंधित होते हैं।
भारत ने दिया करारा जवाब, कहा—ऐसी भाषा बेहद आपत्तिजनक
जेडी वेंस के बयान पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने सख्त प्रतिक्रिया व्यक्त की। मंत्रालय ने कहा कि कुशल भारतीय पेशेवरों के लिए ऐसी शब्दावली का इस्तेमाल अनुचित और बेहद अपमानजनक है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, अमेरिका में काम करने वाले भारतीय पेशेवर अपने कौशल, प्रतिभा और अनुभव के माध्यम से वहां की आर्थिक प्रगति और तकनीकी विकास में अहम भूमिका निभा रहे हैं। भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि कुशल पेशेवरों की आवाजाही से भारत और अमेरिका दोनों को लाभ होता है। अमेरिकी सरकार के हालिया फैसले दोनों देशों के साझा आर्थिक हितों और तकनीकी सहयोग को प्रभावित कर सकते हैं।
भारत ने याद दिलाया अंग्रेजों का औपनिवेशिक इतिहास
भारतीय विदेश मंत्रालय ने जेडी वेंस द्वारा इस्तेमाल किए गए ‘Indentured Servants’ शब्द की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर भी आपत्ति जताई। दरअसल, इस शब्द का संबंध औपनिवेशिक काल की उस श्रम व्यवस्था से है, जिसमें बड़ी संख्या में भारतीयों को अनुबंध के आधार पर ब्रिटिश उपनिवेशों में काम करने के लिए भेजा जाता था। 1833 में ब्रिटिश साम्राज्य में दास प्रथा समाप्त करने का कानून पारित होने के बाद गिरमिटिया मजदूर व्यवस्था का विस्तार हुआ। इसके तहत 19वीं और 20वीं सदी की शुरुआत में लाखों भारतीय मजदूरों को मॉरीशस, फिजी, त्रिनिदाद, गुयाना और दक्षिण अफ्रीका जैसे क्षेत्रों में भेजा गया। इन मजदूरों को निर्धारित अवधि तक कठिन परिस्थितियों में काम करना पड़ता था। कई स्थानों पर उन्हें शोषण, खराब जीवन परिस्थितियों और सीमित स्वतंत्रता का सामना करना पड़ा। भारत का कहना है कि इस तरह की दर्दनाक ऐतिहासिक और औपनिवेशिक विरासत की याद दिलाने वाली भाषा का इस्तेमाल आधुनिक कुशल पेशेवरों के लिए करना आपत्तिजनक है।
माइक्रोसॉफ्ट, TCS, इन्फोसिस समेत 8 IT कंपनियों पर अमेरिका की कार्रवाई
विवाद के बीच अमेरिकी श्रम विभाग ने आठ प्रमुख टेक्नोलॉजी और आईटी सेवा कंपनियों को PERM यानी Permanent Labor Certification कार्यक्रम से निलंबित कर दिया है।
इस कार्रवाई में शामिल कंपनियां हैं—
Microsoft
Adobe
Capgemini
Infosys
Tata Consultancy Services (TCS)
Wipro
HCL Technologies
Cognizant
अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि कुछ कंपनियां विदेशी कर्मचारियों की भर्ती से जुड़े प्रावधानों का अनुचित इस्तेमाल कर रही हैं। सरकार ने इस कार्रवाई को अमेरिकी कर्मचारियों के रोजगार और वेतन की सुरक्षा से जोड़ा है। हालांकि, संबंधित कंपनियों की ओर से भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर अलग-अलग स्पष्टीकरण सामने आए हैं।
क्या है PERM प्रोग्राम और भारतीय कर्मचारियों पर क्या होगा असर?
PERM अमेरिका में रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड प्राप्त करने की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस व्यवस्था के तहत अमेरिकी नियोक्ता को यह प्रमाणित करना होता है कि संबंधित पद के लिए निर्धारित शर्तों के अनुसार योग्य और उपलब्ध अमेरिकी कर्मचारी नहीं मिल रहे हैं और विदेशी कर्मचारी की नियुक्ति से अमेरिकी श्रमिकों के वेतन एवं कार्य परिस्थितियों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। आठ कंपनियों के PERM कार्यक्रम से निलंबन का असर उन विदेशी कर्मचारियों पर पड़ सकता है, जो इन कंपनियों के माध्यम से अमेरिका में स्थायी निवास प्राप्त करने की प्रक्रिया में हैं। हालांकि, भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि PERM कार्यक्रम पर रोक लगने का मतलब मौजूदा H-1B वीजा का स्वतः रद्द होना नहीं है। वैध H-1B वीजा धारकों और उनके आश्रितों की मौजूदा स्थिति इस फैसले से सीधे समाप्त नहीं होती।
भारतीय IT प्रोफेशनल्स के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह विवाद?
अमेरिका के H-1B वीजा कार्यक्रम में भारतीय पेशेवरों की बड़ी हिस्सेदारी है। हजारों भारतीय इंजीनियर, सॉफ्टवेयर डेवलपर, टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ और अन्य कुशल कर्मचारी अमेरिकी कंपनियों में कार्यरत हैं। भारतीय पेशेवर अमेरिकी टेक्नोलॉजी सेक्टर, रिसर्च, डिजिटल सेवाओं और इनोवेशन से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देते हैं। ऐसे में अमेरिका की वीजा और ग्रीन कार्ड संबंधी नीतियों में बदलाव का असर भारतीय पेशेवरों के करियर, लंबी अवधि की रोजगार योजनाओं और स्थायी निवास की संभावनाओं पर पड़ सकता है।
अमेरिका के निर्माण में भी प्रवासियों का रहा बड़ा योगदान
भारत ने अपनी प्रतिक्रिया में अमेरिका के विकास में प्रवासी समुदायों की ऐतिहासिक भूमिका का भी उल्लेख किया। अमेरिका के औद्योगिक और आर्थिक विकास में अलग-अलग देशों से आए प्रवासियों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। कृषि, रेलवे, विनिर्माण, व्यापार, विज्ञान और तकनीक सहित कई क्षेत्रों में प्रवासी समुदायों की भूमिका रही है। अमेरिका के शुरुआती इतिहास में दास प्रथा और जबरन श्रम का दर्दनाक अध्याय भी शामिल रहा है। बाद के दशकों में विभिन्न प्रवासी समुदायों ने देश के सामाजिक और आर्थिक विकास में योगदान दिया। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इसी ऐतिहासिक संदर्भ में प्रवासी पेशेवरों के प्रति सम्मानजनक भाषा और व्यवहार की आवश्यकता पर जोर दिया।
H-1B विवाद से भारत-अमेरिका संबंधों पर नई बहस
जेडी वेंस की टिप्पणी और आठ बड़ी कंपनियों के खिलाफ अमेरिकी प्रशासन की कार्रवाई ने भारत-अमेरिका संबंधों में कुशल पेशेवरों की आवाजाही और रोजगार नीतियों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। एक ओर अमेरिकी प्रशासन घरेलू रोजगार की सुरक्षा और वीजा व्यवस्था में कथित दुरुपयोग रोकने की बात कर रहा है, वहीं भारत ने कुशल भारतीय कर्मचारियों के योगदान और सम्मान की रक्षा पर जोर दिया है। अब इस विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह होगा कि PERM कार्यक्रम पर लगी पाबंदियों की अवधि और कानूनी स्थिति क्या रहती है तथा दोनों देशों के बीच पेशेवरों की आवाजाही और तकनीकी सहयोग पर इसका कितना प्रभाव पड़ता है। फिलहाल, भारत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि विदेशों में काम कर रहे भारतीय पेशेवरों के योगदान को कमतर आंकना और उनके लिए अपमानजनक शब्दावली का इस्तेमाल करना स्वीकार्य नहीं है।
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