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“चोटी खिंचना पाप नहीं महा पाप…” यूपी के डिप्टी CM ब्रजेश पाठक का बड़ा बयान, शिवपाल बोले- इस्तीफा दे…

Shankaracharya Avimukteshwaranand Controversy

Shankaracharya Avimukteshwaranand Controversy: उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने लखनऊ में मीडिया से बातचीत के दौरान बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि माघ मेले के दौरान जो बटुकों की चोटी को खींचा गया है उसको कोई भी सही नहीं ठहरा सकता इसी संबंध में जबाव में हमने कहा था. चोटी खिंचना पाप नहीं महा पाप है. जो भी दोषी है उसको कड़ी सजा मिलेगी. इससे पहले डिप्टी सीएम से जब एक न्यूज चैनल के कॉन्क्लेव में माघ मेले में मौनी अमावस्या पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के साथ हुए विवाद पर सवाल किया गया था. हालांकि उन्होंने शंकराचार्य का नाम नहीं लिया. उनके बयान को ब्राह्राणों की नाराजगी के बीच डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.

“उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए”
वहीं उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के बयान पर समाजवादी पार्टी नेता शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि वो उसी पार्टी के हिस्सा हैं और मंत्रिमंडल में भी हैं, तो अगर उनको इतना ही बुरा लगा है, तो उनको इस्तीफा दे देना चाहिए. पाप तो उनको भी लगेगा, पाप उनको इसलिए लगेगा कि उसी मंत्रिमंडल के वो भी सदस्य हैं. अपमान तो वहीं से हुआ है, तो तुरंत उनको इस्तीफा दे देना चाहिए.

कांग्रेस नेता आराधना मिश्रा ने कहा कि ये तो हम लोग पहले कह रहे थे, आज इस सरकार के डिप्टी सीएम कह रहे हैं तो ये बात और पुष्ट हो गई, जो कांग्रेस पार्टी और सभी विपक्षी दल कह रहे थे.

मौनी अमावस्या पर क्या हुआ था?
दरअसल, 18 जनवरी को माघ मेले में मौनी अमावस्या पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में स्नान करने जा रहे थे. शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी पुलिस ने रोक दी थी. पुलिस ने उनसे पैदल संगम जाने को कहा. शंकराचार्य के शिष्य नहीं माने और पालकी लेकर आगे बढ़ने लगे. इसपर पुलिस और शिष्यों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई. पुलिस ने कई शिष्यों को हिरासत में ले लिया. इससे शंकराचार्य नाराज हो गए और शिष्यों को छुड़वाने पर अड़ गए.

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अफसरों ने उन्हें समझाने की कोशिश की लेकिन वे नहीं माने. इसके बाद पुलिस ने शंकराचार्य के कई और समर्थकों को हिरासत में ले लिया. शंकराचार्य की पालकी को खींचते हुए संगम से 1 किलोमीटर दूर तक ले जाया गया. इस दौरान पालकी छत्र टूट गया था. शंकराचार्य स्नान भी नहीं कर पाए थे. शंकराचार्य 28 जनवरी तक अपने शिविर के बाहर धरने पर रहे फिर वापस वाराणसी लौट आए.

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