Sant Rampal News: हरियाणा के चर्चित संत और सतलोक आश्रम के प्रमुख रामपाल को देशद्रोह के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है. देशद्रोह के मामले में रामपाल को कोर्ट ने जमानत दे दी है. करीब 11 साल 4 महीने और 20 दिन हिसार जेल में काटने के बाद रामपाल को अब रिहा कर दिया जाएगा. फिलहाल हाईकोर्ट का जमानत आदेश संबंधित ट्रायल कोर्ट में पहुंचेगा. उसके बाद बॉन्ड भरने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आदेश जेल प्रशासन तक पहुंचेंगे फिर उन्हें रिहा किया जाएगा. जिसको लेकर संत रामपाल के समर्थकों में खुशी का माहौल है. वहीं प्रशासनिक स्तर पर आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर रखी जा रही है.
साल 2014 में हुई थी संत रामपाल की गिरफ्तारी
बता दें कि साल 2006 में हरियाणा में संत रामपाल के अनुयायियों और एक अन्य धार्मिक समूह के बीच झड़पें हुई थी. जिसको लेकर संत रामपाल पहली बार चर्चाओं में आए थे. इसके बाद साल 2014 में हिसार स्थित संत रामपाल के आश्रम में पुलिस के साथ हिंसक गतिरोध में 6 लोगों की मौत हो गई थी. रामपाल की गिरफ्तारी के लिए पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी. उनके ऊपर गैरकानूनी कारावास बनाने और लोगों को प्रताड़ित करने जैसे कई गंभीर आरोप लगे थे. FIR के अनुसार, जब पुलिस रामपाल को गिरफ्तार करने पहुंची तो उन्होंने लगभग 600-700 महिलाओं-बच्चों को आश्रम के मुख्य द्वार के बाहर बैठा दिया था.
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1500-2000 युवा लाठी, बम और बंदूक लेकर आश्रम की छत पर तैनात थे. आश्रम में मौजूद रामपाल के सहयोगियों की तरफ से पुलिस को धमकी दे रहे थे कि वो रामपाल को गिरफ्तार नहीं करने देंगे. कोर्ट ने कुछ मामलों में उनके खिलाफ फैसला सुनाया था. इस सब विवादों के बावजूद देशभर में बड़ी संख्या में संत रामपाल के अनुयायी है. उनका संगठन आश्रम चलाता है टीवी चैनलों, पुस्तकों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों के माध्यम से उनके प्रवचनों का प्रसार करता है.
कौन हैं संत रामपाल?
संत रामपाल सतलोक आश्रम के संस्थापक और भारतीय आध्यात्मिक उपदेशक हैं. हरियाणा में साल 1951 में उनका जन्म हुआ था. वे सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर के रूप में काम कर चुके हैं. इसके बाद उन्होंने भगवत गीता, कबीर सागर और अन्य धर्मग्रंथों की व्याख्याओं के आधार पर आध्यात्मिक शिक्षाओं का प्रचार करना शुरू किया. संत रामपाल के अनुयायी उन्हें आध्यात्मिक गुरु मानते हैं और भक्ति-मोक्ष के उनके दुष्टिकोण में विश्वास करते हैं.



