Middle East war:मिडिल ईस्ट में जंग को लेकर भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा (Sanjay Malhotra) ने बड़ी चेतावनी दी है. रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया की मॉनेटरी पॉलिसी बैठक में मल्होत्रा ने कहा कि आने वाले समय में महंगाई बढ़ सकती है. उन्होंने जीडीपी को लेकर भी चेतावनी जी. हालांकि आरबीआई की तरफ से अभी रेपो रेट में बदलाव नहीं किया गया है. मल्होत्रा ने कहा कि MPC ने यह भी कहा है कि इस साल फरवरी तक के हाई फ़्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स से पता चलता है कि आर्थिक गतिविधियों में मज़बूत रफ़्तार बनी हुई है विकास को मज़बूत निजी खपत और निवेश की मांग से लगातार समर्थन मिल रहा है. हालांकि, पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष से इस विकास में रुकावट आने की संभावना है.
उन्होंने कहा कि ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी, अंतरराष्ट्रीय माल ढुलाई और बीमा लागत में वृद्धि से जुड़ी ज़्यादा इनपुट लागत, और साथ ही सप्लाई चेन में आने वाली रुकावटें जिनसे डाउनस्ट्रीम सेक्टरों के लिए ज़रूरी इनपुट की उपलब्धता सीमित हो सकती है विकास को नुकसान पहुंचा सकती हैं.
“जोखिमों के संतुलन का आकलन कर रही है”
गवर्नर संजय मल्होत्रा (Sanjay Malhotra) ने आगे कहा कि MPC ने पॉलिसी रेपो रेट को अपरिवर्तित रखने के पक्ष में वोट दिया, हालांकि वह सतर्क बनी हुई है, आने वाली जानकारी पर बारीकी से नज़र रख रही है और जोखिमों के संतुलन का आकलन कर रही है. MPC ने एक तटस्थ रुख जारी रखने का भी निर्णय लिया, और आने वाली जानकारी पर समझदारी से प्रतिक्रिया देने का लचीलापन बनाए रखा.
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“कच्चे तेल की बढ़ी हुई कीमतें आयातित मुद्रास्फीति को बढ़ा सकती हैं”
उन्होंने (Sanjay Malhotra) कहा कि सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कच्चे तेल की बढ़ी हुई कीमतें आयातित मुद्रास्फीति को बढ़ा सकती हैं और चालू खाता घाटे को चौड़ा कर सकती हैं. दूसरा, ऊर्जा बाज़ारों, उर्वरकों और अन्य वस्तुओं में व्यवधान उद्योग, कृषि और सेवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं, जिससे घरेलू उत्पादन कम हो सकता है. तीसरा, बढ़ी हुई अनिश्चितता, जोखिम से बचने की बढ़ी हुई प्रवृत्ति और सुरक्षित ठिकाने की मांग घरेलू तरलता की स्थितियों, आर्थिक गतिविधि, उपभोग और निवेश को प्रभावित कर सकती है.



