Assembly Election 2026:समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने विधानसभा चुनाव की तारीखों के एलान के बाद चुनाव आयोग द्वारा कई राज्यों के अधिकारियों को उनके पदों से हटाने पर कहा कि जब कभी भी चुनाव होता है तो यदि प्रदेश में उनकी(भाजपा) सरकार नहीं है तो सबसे पहले वे चीफ सेक्रेटरी और अन्य अधिकारियों को हटाएंगे. उत्तर प्रदेश में ऐसा क्यों नहीं किया जाता है? उत्तर प्रदेश में तो कभी DGP को नहीं हटाया जाता. जब-जब चुनाव हुआ तब चुनाव आयोग को कितनी शिकायतें की गई. लेकिन क्या चुनाव आयोग ने उन्हें हटाया? क्या उन लोगों को हटाया गया जिनके परिवार के लोग ही चुनाव लड़ रहे थे. चुनाव आयोग भाजपा के इशारे पर काम कर रहा है. पूरा देश जानता है कि चुनाव आयोग भाजपा के इशारे पर काम कर रहा है. जो लोग गैस सिलेंडर तक नहीं दे पा रहे हैं वो दुनिया में कहां पहुंचेंगे?
“लोकतांत्रिक परंपराओं के तहत चुनाव संपन्न होगा”
वहीं भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने 5 राज्यों/UTs में चुनाव की तारीखों के ऐलान पर कहा कि चुनाव आयोग की क्षमता, कार्य शीलता पहले से ही प्रतिष्ठित और सम्मानित रही है. मैं समझता हूं कि शांतिपूर्ण तरीके से और लोकतांत्रिक परंपराओं के तहत चुनाव संपन्न होगा. विधानसभा चुनाव की तारीखों के एलान के बाद चुनाव आयोग द्वारा कई राज्यों के अधिकारियों को उनके पदों से हटाने पर उन्होंने कहा कि ये एक सामान्य प्रक्रिया है. जब चुनाव आयोग ये मानता है कि चुनाव की प्रक्रिया का ईमानदारी के साथ पारदर्शी निष्पादन करने की आवश्यकता है जिनका उपयोग किया जाए, उसमें स्थानांतरण भी शामिल है. ये हर चुनाव में देखने को मिलता है.
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“मतगणना एक साथ पहली बार नहीं हो रही है”
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री नरेंद्र कश्यप ने कहा कि चुनाव आयोग एक स्वायत्त संस्था है जो चुनाव की प्रक्रिया को पूर्ण करती है. चुनाव आयोग ने विधानसभा चुनावों की घोषणा की है, कहीं एक तो कहीं दो चरणों में चुनाव होना है. सभी की मतगणना एक साथ पहली बार नहीं हो रही है, चाहे कांग्रेस पार्टी हो, समाजवादी पार्टी या ममता बनर्जी हो सबको समझना होगा कि मतगणना एक साथ होती है. लेकिन विपक्ष इस बात को जानते हुए चुनाव आयोग पर सवाल खड़ा करने की कुचेष्टा करता है.



