PM Narendra Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तेलंगाना के हैदराबाद में एक रैली के दौरान देशवासियों से एक साल तक सोने के गहने न खरीदने की अपील की. उन्होंने कहा कि इससे देश की विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिलेगी. भारत अपनी जरूरत का लगभग पूरा सोना विदेशों से आयात करता है और बढ़ती कीमतों के कारण गोल्ड इम्पोर्ट बिल तेजी से बढ़ रहा है. ऐसे में सरकार विदेशी मुद्रा भंडार और रुपये पर दबाव कम करने की कोशिश कर रही है.
विदेशी मुद्रा बचाने की कोशिश में सरकार
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देशहित में लोगों को कुछ समय के लिए सोने की खरीद कम करनी चाहिए. भारत अपने इस्तेमाल का करीब 99% सोना विदेशों से आयात करता है. 2025-26 में गोल्ड इम्पोर्ट बिल करीब 6.4 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया. कुल आयात खर्च में सोना दूसरे नंबर पर है. सोने की कीमतों में तेज उछाल ने भारत की चिंता बढ़ा दी है. पिछले एक साल में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का दाम तेजी से बढ़ा है, जिससे कम मात्रा में खरीद के बावजूद आयात बिल बढ़ गया. सरकार को डर है कि लगातार बढ़ता गोल्ड इम्पोर्ट विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव डाल सकता है. 2025-26 में भारत ने पिछले कारोबारी साल के मुकाबले 4.76 प्रतिशत कम मात्रा में सोना खरीदा, लेकिन इसके बावजूद इम्पोर्ट बिल में 24 प्रतिशत का उछाल आया.
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जिसकी सबसे बड़ी वजह सोने की तेजी से बढ़ती कीमतें. सोने का दाम 76 हजार डॉलर प्रति किलो से बढ़कर 1 लाख डॉलर प्रति किलो तक पहुंच गया. मौजूदा समय में सोने की कीमत 1.52 लाख डॉलर प्रति किलो है. भारत में सोना सिर्फ गहनों के लिए नहीं, बल्कि निवेश का बड़ा माध्यम भी माना जाता है. World Gold Council के मुताबिक 2026 की पहली तिमाही में निवेश के लिए सोने की मांग गहनों से ज्यादा रही. इन कीमतों पर सोना खरीदने से भारत के फॉरेन रिजर्व में डॉलर तेजी से घटेगा. सोने की कीमतें बढ़ने से गोल्ड इम्पोर्टर्स हाथ पीछे खींच रहे हैं और सोना कम मात्रा में भारत आ रहा है. जनवरी में करीब 100 टन सोना आयात हुआ था, जो मार्च तक घटकर 22 टन रह गया. अप्रैल में यह आंकड़ा 15 टन तक पहुंचने का अनुमान है. यानि अगर आप सोना नहीं खरीदेंगे तो भारत का इम्पोर्ट बिल घटेगा. इससे फॉरेन रिजर्व में डॉलर स्थिर बना रहेगा और रुपया तेजी से कमजोर नहीं होगा.



