Imran Masood: यूपी के सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के एक विवादित बयान पर राजनीति तेज हो गई है. दरअसल, लश्कर-ए-तैयबा के बांग्लादेश मॉड्यूल केस में 8 आतंकियों को गिरफ्तार किया गया है. इसपर जब मीडिया ने इमरान मसूद से सवाल किया तो उन्होंने कहा कि सरकार किसी को भी आतंकी घोषित कर सकती है और वो कभी भी ध्यान भटकाने के लिए कोई भी कदम उठा सकते हैं. कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के बयान पर भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने पलटवार किया है. उन्होंने कहा कि मैं मानता हूं कि कोई भी हो, जो बेगुनाह है, उसको छूआ नहीं जाना चाहिए और जो गुनहगार है, उसको छोड़ा नहीं जाना चाहिए. निष्पक्षता के साथ, पारदर्शिता के साथ गुनहगार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होने में किसी को आपत्ति नहीं है, लेकिन बेगुनाह के खिलाफ किसी तरह का प्रताड़न भी नहीं होना चाहिए. यह सब ही लोग जानते हैं और चाहते हैं.
“आतंकवाद पर कड़ा प्रहार होना चाहिए”
उत्तर प्रदेश से कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि बड़ी स्पष्ट रूप से जांच निष्पक्ष होनी चाहिए और आतंकवाद पर राजनीति नहीं होनी चाहिए. लेकिन आतंकवाद के नाम पर निर्दोषों को भी नहीं फंसाया जाना चाहिए. पुलिस को चाहिए कि गंभीरता से जांच करे. बगैर पक्ष देखे, बगैर पंथ देखे, बगैर धर्म देखे, आतंकवाद के ऊपर कड़ा प्रहार करे, आतंकवाद के नाम पर निर्दोषों पर प्रहार न करे, ये तो बेहतर है. आतंकवाद पर कड़ा प्रहार होना चाहिए.
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“मुसलमानों को क्यों जबरदस्ती फंसाया जाता है”
वहीं महाराष्ट्र से समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक अबू आज़मी ने कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के बयान पर कहा कि बिल्कुल सही बात है. मैं इस बात को सपोर्ट करता हूं. आप देखें, मुंबई में जो सीरियल ब्लास्ट हुआ था, जिसमें 187 लोग मारे गए थे, उसमें 12 नौजवान पकड़े गए और निचली अदालत ने फांसी की सजा सुनाई. हाईकोर्ट ने न्याय किया और बेगुनाह छूटे. 19 साल तक बेगुनाह जेल में रहे, फिर भी हमारी सरकार ने जाकर सुप्रीम कोर्ट में केस डाल दिया. लेकिन मालेगांव ब्लास्ट में आरोपियों के संबंध में सरकारी वकील से कहा गया कि इनके साथ नर्मी बरती जाए. उसमें अधिकतम गवाह होस्टाइल हो गए और ये छूट गए. छूटने के बाद इनके खिलाफ अपील भी नहीं की गई. तो सामने दिख रहा है कि देश के अंदर कानून क्या है? मुसलमानों को क्यों जबरदस्ती फंसाया जाता है?



