Vande Mataram Controversy: कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम के गान पर हुए विवाद और वरिष्ठ नेताओं सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी की प्रतिक्रिया पर कहा कि भाजपा एक घटिया, स्तरहीन आरोप लगा रही है जो झूठा है, यह उतना ही झूठा है, जितना भाजपा का राष्ट्रप्रेम, भूल गए जब वंदे मातरम गाकर हम कांग्रेस के झंडे के साथ अंग्रेजों की लाठियां खा रहे थे? तब भाजपा का मातृ संगठन अंग्रेजों के साथ खड़ा था और देश की आजादी का विरोध कर रहा था. वे सोनिया गांधी जैसी महान शख़्सियत पर झूठे और ओछे आरोप लगा रहे हैं.
“भाजपा की घटिया मानसिकता की परिचायक है”
प्रमोद तिवारी ने आगे कहा कि एक दिन पहले जब राज्यसभा में सत्रावसान हुआ था तो वंदे मातरम का गायन हुआ था. सोनिया गांधी के बगल वाली सीट मेरी है. खड़े होकर वंदे मातरम के एक-एक शब्द से उन्होंने स्वर मिलाया था. अगर भाजपा को अपने लोगों पर विश्वास हों तो केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री से पूछ लें कि शिष्टाचार भेंट के दौरान सोनिया गांधी ने किरेन रिजिजू को सराहा कि उनके होंठ लगातार वंदे मातरम पर चल रहे थे, ये अच्छी बात है. जिसने आपके मंत्री की वंदे मातरम पर प्रशंसा की हो, उस पर ऐसा घटिया, स्तरहीन आरोप लगाना भाजपा की घटिया मानसिकता की परिचायक है.
“भाजपा को अपने गिरेबान में झांकना चाहिए”
कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने कहा कि सोनिया गांधी जितना देश से प्यार करती हैं, भाजपा के अंदर उनके मुकाबले का एक भी नेता नहीं है इसलिए सोनिया गांधी पर उंगली उठाने से पहले भाजपा को अपने गिरेबान में झांकना चाहिए कि 1947 से पहले उनकी राष्ट्रीयता, उनका देशप्रेम कहां चला गया था? जहां तक वंदे मातरम का ताल्लुक है तो रविंद्र नाथ टैगोर और महात्मा गांधी, दोनों ने 1937 में वंदे मातरम के वो दो छंद अपनाए थे जिनका ताल्लुक मातृभूमि से हैं। अन्य दो छंदों को हटा दिया गया था जिनका ताल्लुक हिंदू धर्म से है क्योंकि देश के अंदर अन्य धर्मों के भी लोग हैं और सबको साथ रखना है तो धर्मनिरपेक्षता को मजबूत रखना पड़ेगा. भाजपा का आज लोकसभा और राज्यसभा में बहुमत है इसलिए उन्होंने मुसलमानों और ईसाईयों की भावनाओं से खिलवाड़ करने की दिशा में ये कानून बनवाया.
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