Medical Stores Strike: देश भर में आज(20 मई) मेडिकल स्टोर्स की हड़ताल है. केमिस्ट, फार्मासिस्ट और दवा डिस्ट्रीब्यूटरों के संगठन ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट की तरफ से यह हड़ताल बुलाई गई है. जिसके चलते आज देशभर में मेडिकल स्टोर्स बंद हैं. दिल्ली से लेकर मुंबई, कोलकाता, पटना और जयपुर तक के दवा बाजारों में इसका असर दिखाई दे रहा है.
ऑनलाइन दवा बिक्री का विरोध
देशभर के केमिस्ट संगठनों ने ई-फार्मेसी और इंस्टेंट मेडिसिन डिलीवरी ऐप्स के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. उनका आरोप है कि ये प्लेटफॉर्म बिना स्पष्ट नियमों और पर्याप्त निगरानी के काम कर रहे हैं, जिससे छोटे मेडिकल स्टोरों का कारोबार प्रभावित हो रहा है. केमिस्ट संगठनों का कहना है कि यह केवल व्यापार का मुद्दा नहीं, बल्कि मरीजों की सुरक्षा और दवा वितरण व्यवस्था से जुड़ा गंभीर मामला है. AIOCD ने कहा कि यह सिर्फ व्यापार बचाने की लड़ाई नहीं है बल्कि दवा सुरक्षा और मरीजों की सुरक्षा का मुद्दा भी है. संगठन का आरोप है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बिना सही प्रिस्क्रिप्शन जांच किए दवाइयां बेची जा रही है. कोविड के दौरान लागू हुए अस्थायी नियमों का अब स्थायी कारोबारी मॉडल की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है. AIOCD के अनुसार, कोविड में होम डिलीवरी की सुविधा के लिए GSR 220(E) अस्थायी व्यवस्था शुरू की गई थी. लेकिन ई-फार्मेसी अभी भी इसका इस्तेमाल कर रही है.
क्या हैं AIOCD की मांगें?
1. AIOCD की मांग है कि प्रीडेटरी प्राइसिंग पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार सख्त कदम उठाए.
2. ऑनलाइन फार्मेसी और बड़ी कॉरपोरेट कंपनियों की जांच कर छोटे केमिस्ट दुकानदारों के हितों की रक्षा की जाए.
3. NPPA, DCGI, CCI और राज्य ड्रग कंट्रोलर को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए जाएं.
4. सरकार यह सुनिश्चित करे कि दवाओं के प्रिस्क्रिप्शन सिस्टम में किसी प्रकार की डुप्लीकेसी न हो.
5. प्रतिबंधित दवाएं आसानी से उपलब्ध न हों तथा डॉक्टरों और केमिस्टों का सही पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए.
6. ऐसा सुरक्षित क्यूआर कोड सिस्टम बनाया जाए, जो मरीज के मोबाइल पर एक बार खुलने के बाद दोबारा इस्तेमाल न किया जा सके.
7. यह पूरी व्यवस्था किसी निजी पोर्टल के बजाय सरकारी पोर्टल के माध्यम से संचालित की जाए.
8. AIOCD ने कहा है कि यदि सरकार इस प्रकार का सुरक्षित और पारदर्शी सिस्टम लागू करती है, तो संस्था पूरा सहयोग देगी.
AIOCD को किन बातों पर है आपत्ति?
1. फर्जी प्रिस्क्रिप्शन पर दवाओं की बिक्री: AIOCD के महासचिव राजीव सिंघल का कहना है कि कई ई-फार्मेसी और इंस्टेंट डिलीवरी प्लेटफॉर्म बिना वैध डॉक्टर प्रिस्क्रिप्शन के भी दवाएं उपलब्ध करा रहे हैं. इससे गलत दवाओं के इस्तेमाल और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं.
2. ऑनलाइन फार्मेसी के लिए सख्त नियमों की मांग: दवा विक्रेताओं का कहना है कि जैसे पारंपरिक मेडिकल स्टोर सख्त नियमों और रिकॉर्ड प्रणाली के तहत काम करते हैं, वैसे ही ऑनलाइन फार्मेसी को भी नियंत्रित किया जाना चाहिए. खासकर एंटीबायोटिक्स, नशीली दवाएं और प्रेग्नेंसी किट जैसी संवेदनशील दवाओं की बिक्री पर निगरानी जरूरी है.
3. प्रतिबंधित दवाओं की ऑनलाइन बिक्री पर चिंता: एआईओसीडी का आरोप है कि कुछ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बिना उचित जांच के प्रतिबंधित दवाएं बेच रहे हैं. ऑनलाइन लेनदेन में फर्जी प्रिस्क्रिप्शन इस्तेमाल होने का खतरा भी अधिक बताया गया है, जिससे दवा दुरुपयोग की आशंका बढ़ती है.
4. भारी डिस्काउंट से बाजार प्रभावित होने का आरोप: कई दवाओं की कीमतें NPPA तय करती है, लेकिन ऑनलाइन कंपनियां भारी छूट देकर बाजार संतुलन बिगाड़ रही हैं. दवा विक्रेताओं का कहना है कि रिटेल केमिस्ट को सामान्यतः लगभग 16% मार्जिन मिलता है, इसलिए इतने बड़े डिस्काउंट व्यावसायिक रूप से असामान्य लगते हैं.
5. कानूनी मान्यता और नकली दवाओं का मुद्दा: दवा विक्रेताओं के अनुसार ऑनलाइन दवा बिक्री को अभी पूरी तरह स्पष्ट कानूनी मान्यता नहीं मिली है। कुछ मामलों में नकली और प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री के आरोप भी सामने आए हैं, जिन पर DCGI और विभिन्न राज्य सरकारें पहले कार्रवाई कर चुकी हैं.’



