CBSE : केंद्र सरकार ने सीबीएसई में ऑन स्क्रीन मार्किंग प्रक्रिया को लेकर विवाद के चलते बोर्ड चेयरमैन और सचिव को हटा दिया है। बताते दें कि सीबीएसई की 12वी की परीक्षा में ऑन स्क्रीन मार्किंग को लेकर उस समय विवाद उठ गया जब छात्रों ने मार्किंग में गडबडी होने और सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए थे उसके बाद देशभर के लगभग चार लाख छात्रों ने रीमार्किंग के लिए आवेदन कर दिया। नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी सीबीएसई सर्विस टेंडर प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। केन्द्र सरकार की ओर से मंगलवार को एक्शन लेते हुए उक्त कदम उठाया है।
जांच के आदेश
सीबीएसई सर्विस के टेंडर और खरीद प्रक्रिया की जांच के लिए कमेटी गठित की गई है। उधर, जानकारी मिली है कि री-इवैल्यूएशन पोर्टल पर साइबर अटैक हुआ। सीबीएसई के अनुसार, 2 मिनट में 15 लाख एक्सेस अटेंप्ट हुए, जबकि 1 लाख से ज्यादा बार सिस्टम की फाइलों तक बिना अनुमति पहुंचने की कोशिश की गई। साइबर अटैक के बावजूद पोर्टल काम करता रहा और दोपहर 3 बजे तक 16 हजार से ज्यादा छात्रों ने आवेदन कर दिया। यह पोर्टल सोमवार से शुरू होना था।
यह रहा मामला
दरअसल, 13 मई को सीबीएसई ने 12वीं का रिजल्ट जारी किया था। इस बार पहली बार कॉपियां कंप्यूटर स्क्रीन पर चेक की गई थीं। रिजल्ट आने के बाद कई छात्रों ने नंबरों को लेकर शिकायत की, जिसके बाद पूरे मामले की जांच शुरू की गई।
स्टूडेंट ने संसदीय समिति को बताई 15 खामियां
- CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली से प्रभावित 12वीं के छात्र सार्थक सिद्धांत मंगलवार को संसद की स्थायी समिति के सामने पेश हुए। उन्होंने OSM प्रणाली के लागू होने और इसके टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर अपनी बात रखी।
- सूत्रों के मुताबिक, संसद भवन एनेक्सी में शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल मामलों की संसदीय स्थायी समिति की बैठक में सार्थक सिद्धांत ने कहा- मेरे ब्लॉग के अनुसार कम से कम 15 खामियां हैं। इसके बाद शिक्षा मंत्रालय ने CBSE से कोएम्प्ट (COEMPT) को टेंडर देने को लेकर बोर्ड से रिपोर्ट मांगी है।
यह भी पढ़ें : नेपाली PM बालेन शाह की सीमा विवाद वाली टिप्पणी पर विदेश मंत्रालय का बड़ा बयान, कहा- लगभग 98% सीमा…
यह भी देखें: रोजदा की बदहाल सड़कें बनी मौत का रास्ता | 7 KM का सफर 1 घंटे में | मरीज रास्ते में तोड़ रहे दम



