Rajyasabha Candidates : यूपी में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 16 अक्टूबर को चुनाव होने हैं। भाजपा की प्रदेश इकाई ने 8 सीटों के लिए केंद्रीय नेतृत्व को 24 उम्मीदवारों के नाम भेजे थे जिनमें से आज भाजपा की ओर से 8 सीटों पर उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है। इनमें 2 महिलाएं हैं। बाराबंकी की पूर्व सांसद प्रियंका सिंह रावत और बरेली की श्रुति गंगवार को भाजपा ने उम्मीदवार बनाया गया है। श्रुति झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार की बेटी हैं। वह वर्तमान में बरेली अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड की अध्यक्ष हैं। अन्य उम्मीदवारों में धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृषण पाण्डेय, राम प्रताप सिंह चौहान हैं।
सपा ने दो प्रत्याशी की घोषणा
दूसरी ओर समाजवादी पार्टी ने दो प्रत्याशियों का नाम की घोषणा की है। प्रत्याशी धनराज परिमल नथवानी रिलायंस इंडस्ट्रीज के ग्रुप प्रेसिडेंट हैं। उन्हें जाने-माने बिजनेसमैन मुकेश अंबानी का करीबी माना जाता है। वह गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के प्रेसिडेंट भी हैं। पिता परिमल नथवानी झारखंड से निर्दलीय राज्यसभा सांसद हैं।
जबकि सपा के दूसरे प्रत्याशी प्रो.रामगोपाल यादव, अखिलेश यादव के चाचा हैं। वह 90 के दशक से लगातार राज्यसभा में सपा की ओर से जा रहे हैं। एक बार लोकसभा सांसद भी रह चुके हैं। वर्तमान में राम गोपाल यादव पार्टी के प्रमुख महासचिव भी हैं।
राज्यसभा की सीटों के लिए पार्टीयों का गणित
यूपी विधानसभा में कुल सीटों की संख्या 403 है। मौजूदा समय में 7 सीटें खाली हैं। यानी, मौजूदा समय में 396 विधायक हैं। राज्यसभा की 10 सीटों पर चुनाव के लिए जो फॉर्मूला अपनाया जाएगा, वह 396/111 होगा। यानी 396 को 11 से भाग देने पर जो संख्या आएगी, उसमें एक जोड़ा जाएगा। यानी एक सदस्य को चुनने के लिए 37 प्रथम वरीयता वोट की जरूरत पड़ेगी। अगर किसी ने एक्स्ट्रा कैंडिडेट नहीं उतारे तो बीजेपी 8 और सपा 2 प्रत्याशी निर्विरोध जिताने में सफल होगी। लेकिन अगर चुनाव हुए तो दोनों खेमों में किसी एक का गणित बिगड़ सकता।
सपा के पास विधायक कम
दरअसल, सपा के पास मौजूदा समय में 100 विधायक ही हैं। इसमें से भी रमाकांत यादव जेल में बंद हैं। यानी संख्या घटकर 99 रह जाती है। वह दो प्रत्याशी तो आराम से जिता सकती लेकिन तीसरे प्रत्याशी को उतारती है तो वोटिंग होना तय है। ऐसे में सपा को तीसरे प्रत्याशी को जिताने के लिए कम से कम 12 और एक्स्ट्रा वोटों की जरूरत पड़ेगी। इस स्थिति में भाजपा को 8वां कैंडिडेट जिताने के लिए कम से कम 6 एक्स्ट्रा वोटों की जरूरत पड़ेगी। अगर वोटिंग होती है तो क्रास वोटिंग का भी खतरा मंडराने लगेगा।
विधायकों को प्रशिक्षण
ऐसे में दूसरी और तीसरी वरीयता के वोटों की गिनती अहम हो जाती है। इसके लिए विधायकों को बकायदा प्रशिक्षण दिया जाता है। उन्हें बताया जाता है कि किस विधायक को किस कैंडिडेट के लिए प्रथम वरीयता पर रखना है और किसे दूसरी व तीसरी वरीयता पर। इसी तरह गिनती में निर्धारित कोटे तक पहुंचने पर संबंधित प्रत्याशी को विजयी घोषित कर दिया जाता है।
भाजपा उम्मीदवार –
1.धर्मपाल सिंह- उत्तर प्रदेश BJP के प्रदेश महामंत्री संगठन हैं. संगठन में लंबे समय तक काम करने वाले प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं. पार्टी संगठन में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है. राज्यसभा टिकट के जरिए BJP ने संगठन के अनुभवी चेहरे को संसद भेजने का फैसला किया है. धर्मपाल सिंह लोधी जाति से हैं. OBC प्रतिनिधित्व के लिहाज से भी उनका नाम महत्वपूर्ण है.
2. राधाकांत ओझा- BJP के वरिष्ठ नेता और ब्राह्मण चेहरा हैं. संगठन में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं. राज्यसभा सूची में उनका नाम ब्राह्मण प्रतिनिधित्व के लिहाज से महत्वपूर्ण है. उनकी उम्मीदवारी को BJP के सामाजिक संतुलन से जोड़कर देखा जा रहा है.
3. प्रकाश पाल- उत्तर प्रदेश BJP संगठन में सक्रिय रहे हैं. BJP के प्रदेश स्तर के संगठनात्मक काम में उनकी भूमिका रही है. OBC प्रतिनिधित्व के लिहाज से उनका नाम अहम है. 2027 से पहले राज्यसभा के जरिए पार्टी ने संगठन से जुड़े चेहरे को आगे किया है.
4. विद्यासागर सोनकर- पूर्वांचल के बड़े BJP नेता हैं. उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य रह चुके हैं. अधिवक्ता और सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता के तौर पर भी पहचान है. दलित प्रतिनिधित्व के लिहाज से उनकी उम्मीदवारी महत्वपूर्ण है. जौनपुर और पूर्वांचल के राजनीतिक समीकरण से भी उनका जुड़ाव है.
5. गोपी कृष्ण पांडेय- BJP के ब्राह्मण चेहरे हैं. पार्टी संगठन में सक्रिय भूमिका निभाई है. राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची में उन्हें शामिल किए जाने से ब्राह्मण प्रतिनिधित्व को जगह मिली है. राधाकांत ओझा के साथ उनका नाम BJP की सामाजिक संतुलन वाली सूची में देखा जा रहा है.
6. प्रियंका सिंह रावत- बीजेपी की प्रदेश टीम का अहम हिस्सा हैं. 2014 में बाराबंकी से लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंची थीं. 2014 से 2019 तक लोकसभा सांसद रहीं. दलित समुदाय से आती हैं और महिलाओं के बीच काफी मुखर चेहरा.
7. राम प्रताप सिंह चौहान- बीजेपी के प्रदेश महामंत्री रहे हैं. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में संगठन की जिम्मेदारी भी संभाली है. उनकी उम्मीदवारी इसलिए खास है क्योंकि पार्टी ने सक्रिय संगठनात्मक चेहरे को राज्यसभा भेजने का फैसला किया है. पश्चिमी यूपी के संगठन और 2027 की तैयारी में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है.
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