Parliament Budget Session: उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने आज(10 फरवरी) संसद में बीजेपी सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि बजट का हलवा यहां ज़्यादा बंटा कि वहां. सपा नेता की बयान पर वहां मौजूद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण मुस्कुराती दिखाई दी. अखिलेश यादव ने आगे कहा कि स्वदेशी और आत्मनिर्भर ये शब्द तो बहुत अच्छे लगते हैं, लेकिन जब ये डील हो गई है, तो क्या इस बजट को लाने से पहले ‘आत्मनिर्भरता’ और ‘स्वदेशी’ को अपने-अपने शब्दकोश से हटा दिया है. या उसको उल्टे अर्थ में विलोम शब्दकोश में डाल दिया है. ये डील नहीं है जो आप और हम सब समझ पा रहे हैं शायद सत्ता पक्ष के लोग ये नहीं समझ पा रहे होंगे. लेकिन पूरा देश समझ पा रहा है कि हमने अपना बाजार एक बार और खोल दिया है. 500 बिलियन डॉलर का व्यापार एकतरफा हमारी आत्मनिर्भरता कहां जाएगी. स्वदेशी नारा कहां जाएगा, हमारी देश की जनता भाजपा से कह रही है कि जहां तक हमें मालूम है डील एकतरफा नहीं होती है. जनता भाजपा से ये भी जानना चाहती है कि जीरो बड़ा कि 18.
“क्या 18 जीरो के बराबर है”
उन्होंने कहा कि भाजपा का समझौता गणित ये है कि क्या 18 जीरो के बराबर है. देश के किसानों, उद्योगों को बचाने के लिए खोखले शब्दों के अलावा भाजपा के पास कोई और सुरक्षा कवच या सुरक्षा योजना है कि नहीं है. इसलिए मैं कहना चाहता हूं कि ये बजट दिशाहीन है. इस बजट में कोई विजन नहीं है कि 2047 तक हमारा देश विकसित भारत बन जाएगा. समाजवादी पार्टी को तो सरकार से पहले ही उम्मीद नहीं थी जिस सरकार से उम्मीद न हो, उसके बजट से क्या उम्मीद होगी.
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“डील पहले बनी या बजट”
सपा प्रमुख ने एक शायरी बोलते हुए कहा कि क्यों झूठे ख्यालों में दिनरात करें, जो बनाते हैं हवा में बातों के महल, आओं उनसे कुछ जमीनी बात करें, बजट आने के पहले और बजट आने के बाद, पूरे देश में इस बात की बहस चल रही थी कि अमेरिका के साथ डील होने जा रही है. मुझसे पहले अभी जो भारतीय जनता पार्टी की सदस्य बोल रही थीं और भारतीय जनता पार्टी का यह पक्ष है कि हम लोगों ने दुनिया में बहुत सारे देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट कर लिया है. मैं बीजेपी से जानना चाहूंगा कि अभी कितने देश और बचे हैं जिनसे आप फ्री ट्रेड एग्रीमेंट नहीं कर पाए हैं. कुछ ऐसे ही देश बचे होंगे जिनसे आपकी इच्छा होगी कि हम फ्री ट्रेड एग्रीमेंट कर लें.
अगर फ्री ट्रेड एग्रीमेंट हो भी जाते हैं जो लोग कभी रुपए के बारे में बहुत चिंता करते थे कभी-कभी उम्र से या दूसरे लोगों से जोड़ देते थे इतने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट होने के बाद अमेरिका से डील नहीं ढील हुई है. उसके बाद हमारा रुपया कहां पहुंचेगा और अगर यहीं डील होनी थी तो 11 महीने इंतजार क्यों कराया. जितने उद्योग से जुड़े लोग हैं उसके साथ परेशानी क्यों. बजट पर सबसे पहला सवाल यही है. बजट पर सवाल यही है कि डील पहले बनी या बजट?
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