Britain Police : ब्रिटेन की पुलिस ने अमेरिकी सैन्य एयरबेस के पास आतंकी साजिश की आशंका में 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस को रविवार तड़के एक महिला ने एयरबेस की ओर जा रही 3 संदिग्ध वैन की सूचना दी थी। जानकारी मिलने के बाद इलाके में अलर्ट जारी किया गया और आसपास के गांव में 85 घर खाली कराए गए। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार लोगों पर आतंकी हमला करने की तैयारी और विस्फोटक से जुड़े अपराधों का शक है।
महिला बोली- संदिग्ध खेतों और जंगल की ओर भागे
पुलिस को फोन करने वाली महिला ने बीबीसी रेडियो के कार्यक्रम ‘टुडे’ में बताया कि वह एक पार्टी से घर लौट रही थी। घर के पास पहुंची तो रास्ते में तीन सफेद वैन खड़ी मिलीं। रास्ता बंद होने के कारण उसे गाड़ी वापस मोड़नी पड़ी। महिला ने बताया कि थोड़ी दूर जाने पर उसे नकाब पहने कई लोग दिखे। जैसे ही उन लोगों ने उसकी गाड़ी देखी, वे इधर-उधर भागने लगे। कुछ खेतों और जंगल की तरफ भागे, जबकि कुछ पास के गांव की ओर चले गए।
महिला की सक्रियता
महिला के मुताबिक, उसे पहले से पता था कि एयरबेस के आसपास सुरक्षा को लेकर खतरा है। इसलिए उसने तुरंत पुलिस को फोन किया, लेकिन रक्षा मंत्रालय की पुलिस हेल्पलाइन पर किसी ने फोन नहीं उठाया। इसके बाद उसने सुबह 1.36 बजे इमरजेंसी नंबर 999 पर कॉल किया। करीब 10 मिनट के भीतर गांव में हथियारबंद पुलिस पहुंच गई। महिला ने दावा किया कि उसने पांच से ज्यादा संदिग्धों को देखा था, लेकिन पुलिस ने अब तक पांच लोगों को ही गिरफ्तार किया है। हालांकि, पुलिस ने दूसरे संदिग्धों की तलाश किए जाने की पुष्टि नहीं की है।
रक्षा मंत्री ने की महिला की तारीफ
ब्रिटेन के रक्षा मंत्री वेस स्ट्रीटिंग ने संदिग्ध लोगों को देखकर पुलिस को खबर देने वाली महिला की तारीफ की। उन्होंने कहा कि महिला ने सही समय पर समझदारी दिखाते हुए पुलिस को फोन किया। रक्षा मंत्री से पूछा गया कि महिला ने जब सुरक्षा से जुड़ी शिकायत करने के लिए 24 घंटे वाली हेल्पलाइन पर फोन किया, तो किसी ने जवाब क्यों नहीं दिया। उन्होंने कहा कि जांच चल रही है, इसलिए इस बारे में अभी कुछ नहीं कह सकते।
सेना ने रोबोट से वैन की जांच कराई
मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक घटना के बाद सेना की बम निरोधक टीम ने रोबोट की मदद से तीनों वैन की जांच की। सोमवार सुबह तक ग्रामीणों को घर लौटने की अनुमति नहीं मिली थी और वैन को भी वहां से हटाया नहीं गया था। अमेरिकी वायुसेना ने कहा कि आरएएफ फेयरफोर्ड पर तैनात उसके कर्मचारी सतर्क हैं। हालांकि, उसने सुरक्षा कारणों से सुरक्षा व्यवस्था के विशेष तरीकों की जानकारी देने से इनकार कर दिया। लंदन स्थित अमेरिकी दूतावास ने भी ब्रिटेन में रह रहे अमेरिकी नागरिकों को सतर्क रहने और अपनी सुरक्षा का ध्यान रखने की सलाह दी।
ईरान के खिलाफ हमलों में इस्तेमाल होता है एयरबेस
ब्रिटेन के आरएएफ फेयरफोर्ड एयरबेस का इस्तेमाल अमेरिकी वायुसेना करती है। यह लंदन से करीब 160 किमी पश्चिम में है। अमेरिकी सेना कई दशकों से मध्य पूर्व में सैन्य अभियानों के लिए इसका इस्तेमाल करती रही है। 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजराइल की जंग शुरू होने के बाद इस एयरबेस का इस्तेमाल बढ़ गया। अमेरिकी बी-1 और बी-52 बमवर्षक विमानों ने यहां से ईरान से जुड़े सैन्य अभियानों के लिए उड़ान भरी।
ब्रिटेन ने दी थी ईरान के खिलाफ सैन्य बेस की इजाजत
शुरुआत में ब्रिटेन ने ईरान पर हमले के लिए अपने एयरबेस इस्तेमाल करने की ट्रम्प की मांग ठुकरा दी थी। हालांकि, मार्च में तत्कालीन प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने ईरान की मिसाइलों और उनके लॉन्च ठिकानों पर रक्षात्मक कार्रवाई के लिए अमेरिकी सेना को ब्रिटिश एयरबेस इस्तेमाल करने की अनुमति दे दी। यह फैसला ईरान की ओर से ब्रिटेन के हितों और खाड़ी क्षेत्र में उसके सहयोगियों पर हमले किए जाने के बाद लिया गया। ईरान पहले ही चेतावनी दे चुका है कि उसके खिलाफ हमलों के लिए इस्तेमाल होने वाले सैन्य अड्डे भी उसके निशाने पर होंगे।
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