Bharat Band :केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में आज देशभर में भारत बंद का आह्वान किया गया है। दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच और किसान संगठनों ने राष्ट्रव्यापी हड़ताल की घोषणा की है। यूनियनों का दावा है कि इस बंद में देशभर से करीब 30 करोड़ मजदूर और किसान शामिल हो सकते हैं।
हड़ताल के चलते कई राज्यों में जनजीवन प्रभावित होने की आशंका है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, परिवहन सेवाएं, सरकारी कार्यालय और औद्योगिक इकाइयों के कामकाज पर असर पड़ सकता है। विशेष रूप से केरल, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में बंद का व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है, जहां ट्रेड यूनियनों की मजबूत उपस्थिति है।
किन संगठनों ने किया आह्वान?
भारत बंद का आह्वान दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच ने किया है। इनमें ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC), इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (INTUC), सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (CITU), हिंद मजदूर सभा (HMS), ट्रेड यूनियन कोऑर्डिनेशन सेंटर (TUCC), सेल्फ एम्प्लॉयड वीमेन एसोसिएशन (SEWA), ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर (AIUTUC), ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (AICCTU), लेबर प्रोग्रेसिव फेडरेशन (LPF) और यूनाइटेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस (UTUC) शामिल हैं।
संयुक्त किसान मोर्चा (SKM), कृषि मजदूर संगठन, छात्र और युवा संगठनों ने भी बंद का समर्थन किया है।
AITUC की महासचिव अमरजीत कौर के अनुसार, इस बार भागीदारी पिछले आंदोलनों की तुलना में अधिक हो सकती है। उन्होंने बताया कि 9 जुलाई 2025 के प्रदर्शन में लगभग 25 करोड़ लोग शामिल हुए थे। यूनियनों का कहना है कि इस बार 600 से अधिक जिलों में बंद का असर देखने को मिल सकता है।
क्या हैं मुख्य मांगें?
ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों ने केंद्र सरकार की श्रम नीतियों और आर्थिक सुधारों का विरोध करते हुए कई मांगें रखी हैं। इनमें प्रमुख रूप से:
. चार नए श्रम संहिताओं (लेबर कोड) का विरोध
. मजदूरों के अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने की मांग
. पुरानी पेंशन योजना की बहाली
. मनरेगा को मजबूत करने और रोजगार सुरक्षा बढ़ाने की मांग
. निजीकरण और विनिवेश नीतियों पर रोक
. कृषि क्षेत्र से जुड़े नीतिगत बदलावों की मांग
यूनियनों का आरोप है कि नई नीतियां श्रमिकों की सुरक्षा और अधिकारों को कमजोर करती हैं।
क्या रहेगा बंद, क्या खुला?
भारत बंद के कारण बैंकिंग सेवाएं आंशिक रूप से प्रभावित हो सकती हैं। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में कामकाज बाधित होने की संभावना है, हालांकि यह कोई आधिकारिक बैंक अवकाश नहीं है।
कई स्थानों पर बस सेवाएं और स्थानीय परिवहन प्रभावित हो सकते हैं। सरकारी कार्यालयों और कुछ औद्योगिक क्षेत्रों में भी कर्मचारियों की भागीदारी के चलते कामकाज धीमा पड़ सकता है।
हालांकि, अस्पताल, एंबुलेंस, दवा दुकानें और अन्य आपातकालीन सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहने की उम्मीद है। रेलवे और हवाई सेवाएं निर्धारित समय के अनुसार संचालित हो सकती हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर यातायात बाधित होने से यात्रियों को परेशानी हो सकती है।
अलग-अलग राज्यों में अलग असर
भारत बंद का प्रभाव राज्यों और जिलों में स्थानीय स्तर पर यूनियनों की भागीदारी और प्रशासनिक व्यवस्था पर निर्भर करेगा। कुछ राज्यों में बाजार और व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रह सकते हैं, जबकि अन्य स्थानों पर स्थिति सामान्य रह सकती है।
प्रशासन ने कई स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।
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