Ajit Pawar : महाराष्ट की सियासत में अपनी राजनीतिक बुद्विमत्ता और चतुरता के बल पर अपना सिक्का चलाने वाले अजीत पवार का निधन महाराष्ट्र की राजनीति में एक खालीपन छोड गया है जिसे जल्दी भर पाना मुश्किल होगा। यहां तक कि भाजपा को भी अजीत पवार जैसा नेता मिलना भी मुश्किल होगा। अजीत पवार महाराष्ट्र में अपने चाचा और दिग्गज नेता शरद पवार से हटकर अपनी पहचान बनाने में सफल रहे थे। हालांकि अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार की उंगली पकड़कर ही राजनीति में कदम रखा था. उन्होंने अपनी राजनीतिक कौशल के जरिए पार्टी को महाराष्ट्र में मजबूत बनाया. पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर एनसीपी को एक बड़ा जनाधार तैयार किया।
अजीत पवार की राजनीति
देश की सियासत में दिग्गज नेताओं में शुमार शरद पवार ने अपने भतीजे अजित पवार को साल 1982 में राजनीति में लेकर आए। . अजित पवार प्राथमिक शिक्षा की पढ़ाई कर रहे थे, तो उस दौरान उनके चाचा यानी शरद पवार एक दिग्गज सियासी नेता बन चुके थे. राजनीति में कदम रखने के बाद सबसे पहले उन्होंने एक सहकारी चीनी कारखाने के बोर्ड के लिए चुने गए। वो पुणे सहकारी बैंक के अध्यक्ष के रूप में चुने गए।
साल 1991 में पहली बार बारामती संसदीय क्षेत्र से लोकसभा चुने गए, लेकिन बाद में उन्होंने यह सीट अपने चाचा शरद पवार के लिए खाली कर दी. इसके बाद शरद पवार केंद्र में पीवी नरसिम्हा राव सरकार में रक्षा मंत्री बने. यहीं से शरद पवार केंद्र की राजनीति में खुद को सक्रिय कर लिया तो अजित पवार महाराष्ट्र की सियासत की कमान अपने हाथ में ले ली.
यह भी पढ़ें : प्लेन क्रैश में महाराष्ट्र के डिप्टी CM अजीत पवार सहित छह लोगों की मौत, लैंडिंग के दौरान हुआ हादसा
शरद पवार के सियासी वारिस बनकर उभरे
अजित पवार ने अपनी मेहनत और लगन के बाद खुद को शरद पवार के सियासी वारिस के तौर पर महाराष्ट्र में स्थापित किया. महाराष्ट्र की राजनीति पर अपनी पकड़ मजबूत बना ली, इसके बाद साल 1995 में वो पहली बार पुणे जिले में बारामती विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से विधायक बने. इसके बाद से वो लगातार इस निर्वाचन क्षेत्र के विधायक चुने जाते रहे, उन्होंने साल 1995, 1999, 2004, 2009, 2014, 2019 और 2024 में विधायक बने. उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में खुद को स्थापित ही नहीं किया बल्कि अपनी पकड़ भी बनाई.
यह भी देखें : “राजस्थान में कौड़ियों के भाव बिका पेपर!” | REET–OMR घोटाले पर भड़के लादूराम गोदारा
विधायक से डिप्टी सीएम तक का सियासी सफर
अजित पवार ने अपने 45 साल के सियासी सफर में एक बार सांसद और सात बार विधायक रहे. उन्होंने खुद को महाराष्ट्र के राजनीति तक सीमित रखा. सरकार में रहते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण मंत्री पद संभालने का तजुर्बा है, उन्होंने राज्य सरकार में कृषि, ऊर्जा और योजना राज्य मंत्री के रूप में काम किया, उन्होंने सुधाकर नाइक की सरकार में कृषि और बिजली राज्य मंत्री के रूप में काम किया, इसके बाद जब उनके चाचा शरद पवार 1992 और 1993 में मुख्यमंत्री बने तो उन्हें मंत्री बनाया गया.



