एक बड़े राजनीतिक बयान में राज्य की मुख्यमंत्री ने महिलाओं से अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आगे आने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से कुछ नीतियों के नाम पर लोगों के अधिकारों को सीमित करने की कोशिश की जा रही है, उससे महिलाओं को सजग और तैयार रहने की जरूरत है। उन्होंने साफ कहा कि अगर कोई दबाव बनाने की कोशिश करे तो महिलाएं अपने घरों में मौजूद सामान से भी जवाब देने के लिए तैयार रहें।
कृष्णानगर में आयोजित एक रैली में मुख्यमंत्री ने कहा कि माताओं-बहनों की ताकत को कम न आंका जाए। उन्होंने कहा कि चुनावों से पहले बाहरी दबाव बढ़ाने की कोशिश की जाएगी, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है। “अगर आपके नाम किसी भी तरह से हटाए जाते हैं, तो आप चुप मत बैठिए। आपकी रसोई का सामान भी आपके हक की लड़ाई में आपका हथियार बन सकता है,” उन्होंने लोगों को संबोधित करते हुए कहा।
धर्मनिरपेक्षता पर दिया जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि वे पूरी तरह धर्मनिरपेक्ष विचारधारा में विश्वास रखती हैं और किसी भी तरह की सांप्रदायिक राजनीति को बढ़ावा नहीं देतीं। उनका आरोप था कि चुनाव के समय समाज में विभाजन का माहौल बनाने की कोशिश होती है, जिसे रोकना जरूरी है।
उन्होंने यह भी कहा कि देश की आज़ादी के लिए लड़ने वाले लोगों को आज अपनी नागरिकता साबित करने की जरूरत पड़ रही है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
वोटर लिस्ट में गड़बड़ी पर कड़ी चेतावनी
मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि यदि किसी भी योग्य मतदाता का नाम वोटर सूची से हटाया गया, तो वे व्यक्तिगत रूप से विरोध प्रदर्शन करेंगी। उन्होंने दावा किया कि चुनाव से ठीक पहले तेजी से की जा रही प्रक्रियाओं पर संदेह स्वाभाविक है।
उनका कहना था कि वे अभी तक अपनी फ़ॉर्म प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाई हैं और पूछा कि क्या उन्हें भी अब अपनी नागरिकता साबित करनी होगी।
कुछ अधिकारियों की तैनाती पर गंभीर सवाल
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि चुनाव संबंधी प्रक्रियाओं को प्रभावित करने के लिए बाहरी अधिकारियों को तैनात किया जा रहा है, जो स्थानीय प्रशासनिक कार्यों पर नज़र रख रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि कुछ लोगों को विशेष रूप से भेजा गया है ताकि स्थिति पर कड़ी निगरानी रखकर दबाव बनाया जा सके।



