जबलपुर में इन दिनों शहरभर में लगाए गए ‘बाबर मूत्रालय’ पोस्टरों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। कुछ हिंदू संगठनों ने सार्वजनिक शौचालयों और प्रमुख स्थानों पर ये पोस्टर चिपकाकर विरोध दर्ज कराया है। इन पोस्टरों में बाबर को अपमानजनक शब्दों से संबोधित किया गया है, जिसके बाद शहर का माहौल गरमाया हुआ है।
विरोध का कारण क्या है?
विरोध कर रहे संगठनों का कहना है कि हाल ही में एक राजनीतिक बयान में ‘बाबर मस्जिद’ निर्माण को लेकर चर्चा की गई, जिसके बाद उन्होंने इसका विरोध तेज किया। संगठनों का कहना है कि बाबर भारत की संस्कृति और परंपरा के खिलाफ था, इसलिए उसके नाम पर किसी भी प्रकार का धार्मिक ढांचा बनाए जाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
विरोधकर्ताओं का आरोप है कि देश में हजारों मस्जिदें पहले से मौजूद हैं, लेकिन बाबर के नाम का इस्तेमाल हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाता है।
‘बाबर का स्थान शौचालय हो सकता है’ – पोस्टरों का संदेश
शहर के कई चौराहों, दीवारों और सार्वजनिक शौचालयों पर जिन पोस्टरों को चिपकाया गया है, उनमें लिखा है—
“बाबर का स्थान शौचालय हो सकता है, भारत की धरती पर नहीं।”
विरोध कर रहे समूहों ने यह भी कहा कि जब तक संबंधित बयान वापस नहीं लिया जाता, उनका प्रदर्शन जारी रहेगा।
Hindu संगठनों की प्रतिक्रिया
एक स्थानीय संगठन के प्रतिनिधि ने कहा कि बाबर के नाम की किसी भी ईंट को भारत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ऐसे बयान जारी रहे तो इससे तनावपूर्ण स्थितियाँ पैदा हो सकती हैं।
इसी तरह, दूसरे संगठन के एक नेता ने बयान दिया कि यदि बाबर के नाम पर धार्मिक निर्माण की बात दोहराई गई तो वे देशभर में विरोध अभियान चलाने के लिए तैयार हैं। उनका कहना है कि बाबर के नाम को सम्मानित करने की कोई भी कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी।
स्थानीय प्रशासन की नजर
पोस्टर लगाए जाने और उनसे बढ़ रहे विवाद पर प्रशासन की नजर बनी हुई है। फिलहाल अधिकारियों ने किसी भी संभावित तनाव को रोकने के लिए सतर्कता बढ़ा दी है और शहर में शांति बनाए रखने की अपील की है।



