– मुकेश मिश्रा की कलम से..
Vasundhara Raje : राजस्थान BJP की सियासत में एक नाम ऐसा है, जिसके इर्द-गिर्द बरसों तक पूरी राजनीति घूमती रही—वसुंधरा राजे। लेकिन सत्ता बदली… मुख्यमंत्री बदला… संगठन का चेहरा बदला… और अब सवाल ये है कि क्या वसुंधरा राजे का राजनीतिक प्रभाव भी बदल गया है? कार्यक्रम हो रहे हैं, सक्रियता दिखाई दे रही है, लेकिन मीडिया कवरेज को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
BJP की बदली हुई सियासी व्यवस्था का संकेत?
वसुंधरा राजे राजस्थान BJP की सबसे प्रभावशाली नेताओं में रही हैं। दो बार मुख्यमंत्री रह चुकीं राजे का प्रदेश की राजनीति में लंबा प्रभाव रहा है। लेकिन 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद BJP ने भजनलाल शर्मा को मुख्यमंत्री बनाया और राजस्थान में नेतृत्व का नया अध्याय शुरू हुआ। यहीं से सबसे बड़ा सवाल पैदा होता है—क्या सत्ता से बाहर होने के बाद भी वसुंधरा राजे अपनी पुरानी राजनीतिक जमीन और प्रभाव को बनाए रखने की कोशिश कर रही हैं? क्या वसुंधरा राजे की सियासत अब सिर्फ कार्यक्रमों और तस्वीरों तक सिमटती जा रही है? जिस राजस्थान में कभी राजे का नाम ही सत्ता का पर्याय माना जाता था, क्या उसी राजस्थान में अब उनकी राजनीतिक पकड़ को चुनौती मिल रही है?
CM भजनलाल शर्मा से रिश्तों को लेकर सवाल
क्या भजनलाल शर्मा का बढ़ता कद और BJP की नई नेतृत्व व्यवस्था राजे के लिए सबसे बड़ी सियासी चुनौती बन चुकी है? और अगर ऐसा नहीं है… तो फिर राजे के कार्यक्रमों को लेकर बार-बार ये सवाल क्यों उठ रहे हैं कि उन्हें वो राजनीतिक और मीडिया तवज्जो क्यों नहीं मिल रही, जो कभी उन्हें हासिल थी? राजे की राजनीतिक महत्वाकांक्षा और BJP के केंद्रीय नेतृत्व के साथ उनके समीकरण पर पहले भी खूब चर्चा हुई है। 2025 में मोदी और राजे की मुलाकात तथा उससे पहले राजे की संघ नेतृत्व से मुलाकातों को लेकर भी राजनीतिक अटकलें सामने आई थीं। अब राजस्थान में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का नेतृत्व स्थापित है। और इसी बीच भजनलाल शर्मा से जब वसुंधरा राजे के साथ उनके रिश्तों को लेकर सवाल हुआ, तो उन्होंने किसी टकराव की बात नहीं मानी। उनका कहना था कि पार्टी के वरिष्ठ नेता, केंद्रीय मंत्री और कार्यकर्ता मिलकर काम करते हैं और जिसे जो जिम्मेदारी मिलती है, वह उसे निभाता है।
सियासत में सवाल सिर्फ बयानों से खत्म नहीं
लेकिन सियासत में सवाल सिर्फ बयानों से खत्म नहीं होते। सवाल ये है कि अगर राजे की सक्रियता जारी है, तो उनके कार्यक्रमों को राजनीतिक और मीडिया तवज्जो क्यों नहीं मिल रही?
क्या BJP का केंद्रीय नेतृत्व राजस्थान में नई पीढ़ी के नेतृत्व को आगे बढ़ा चुका है? क्या भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में संगठन और सरकार का फोकस अब पूरी तरह नई व्यवस्था पर है? और क्या वसुंधरा राजे के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वे अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता को किस तरह बनाए रखें?
अगली बड़ी राजनीतिक भूमिका क्या होगी—ये सवाल अभी खुला है
क्या वसुंधरा राजे BJP के भीतर वापसी की जमीन तलाश रही हैं?….क्या उनकी सक्रियता सिर्फ कार्यक्रमों तक सीमित है या इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक संदेश है?….क्या राजे के समर्थक अभी भी किसी बड़ी भूमिका की उम्मीद लगाए बैठे हैं?….क्या यही वजह है कि राजस्थान BJP की राजनीति में राजे बनाम नई नेतृत्व व्यवस्था की चर्चा बार-बार लौट आती है? फिलहाल तस्वीर साफ है—राजस्थान में सरकार भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में चल रही है और केंद्रीय नेतृत्व भी मौजूदा व्यवस्था के साथ आगे बढ़ रहा है। वसुंधरा राजे सक्रिय हैं, लेकिन उनकी अगली बड़ी राजनीतिक भूमिका क्या होगी—ये सवाल अभी खुला है। और शायद यही वजह है कि राजस्थान BJP की सियासत में राजे का नाम आज भी खबर से ज्यादा एक सवाल बना हुआ है।
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