Cabinet Meeting : दिल्ली में कैबिनेट की बैठक में कई अहम फैसले लिए गए हैं। पहला रेल कर्मचारियों को बोनस और दूसरा पेंशन योजनाओं के नाम में इंदिरा गांधी शब्द हटाना और दिव्यंाग को जन्म से ही पेंशन मिला करेगी। केंद्र सरकार ने दिवाली से पहले रेलवे कर्मचारियों को बोनस तोहफा दिया है। देशभर के करीब 11.40 लाख कर्मचारियों को 78 दिन का बोनस देने की मंजूरी दी है।
बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक
बुधवार को कैबिनेट की बैठक आयोजित की गई। बैठक में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि रेलवे कर्मचारियों को दिए जाने वाले बोनस पर करीब 2,009 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके अलावा, सरकार ने तीन पेंशन योजनाओं से इंदिरा गांधी का नाम हटाकर उनमें प्रधानमंत्री शब्द जोड़ने का फैसला किया है। दिव्यांगों की पेंशन नियमों में भी बदलाव को मंजूरी दी गई है। इसके तहत अब दिव्यांगों को 18 साल की बजाय जन्म से पेंशन मिलेगी। कैबिनेट ने राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम को अगले पांच साल तक जारी रखने का फैसला भी लिया है।
रेलवे कर्मचारियों को 17,951 रुपये तक बोनस
रेलवे कर्मचारियों को मिलने वाले प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस की गणना के लिए अधिकतम मासिक वेतन सीमा 7,000 तय की गई है। इस आधार पर 78 दिन के बोनस की अधिकतम रकम 17,951 बनती है।
दिव्यांगता की पात्रता सीमा 80 प्रतिशत से घटाकर 40 प्रतिशत
नई व्यवस्था में पेंशन के लिए बेंचमार्क दिव्यांगता की सीमा 80 प्रतिशत से घटाकर 40 प्रतिशत कर दी गई है। इससे पात्रता की शर्तें पूरी करने वाले अधिक दिव्यांग लोग योजना के दायरे में आ सकेंगे।
पेंशन की दरें इस तरह होंगी
0 से 79 साल की उम्र -375 प्रति माह। 80 साल या उससे अधिक उम्ररू 625 प्रति माह। नए नियमों के तहत पात्रता, लाभार्थियों की संख्या और पेंशन की रकम से जुड़ी जानकारी सरकार दिशानिर्देश जारी होने के तीन महीने के भीतर लागू करेगी। दिव्यांगों की पात्रता में यह बदलाव दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुसार किया गया है। इस कानून के तहत 40 प्रतिशत या उससे ज्यादा दिव्यांगता वाले व्यक्ति को बेंचमार्क दिव्यांगता की श्रेणी में रखा जाता है। नियमों के मुताबिक, दिव्यांगों को मिलने वाली सहायता राशि समान श्रेणी की दूसरी योजनाओं के मुकाबले कम से कम 25ः ज्यादा रखने का प्रावधान भी है।
सामाजिक सहायता कार्यक्रम पर ₹53,428 करोड़ खर्च होंगे
राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (छै।च्) को वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने की मंजूरी दी गई है। इस दौरान योजना पर ₹53,428 करोड़ खर्च किए जाएंगे। इससे देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के करीब 3.20 करोड़ लोगों को मदद मिलेगी। राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम की शुरुआत 15 अगस्त 1995 को हुई थी। इसका मकसद गरीब और जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक मदद देना है। यह योजना संविधान के अनुच्छेद 41 में दिए गए प्रावधानों से जुड़ी है। इसके तहत योजना का पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाती है। केंद्र ने बताया कि बुजुर्गों और विधवाओं की पेंशन योजनाएं और राष्ट्रीय परिवार लाभ योजना पहले की तरह चलती रहेंगी। राष्ट्रीय परिवार लाभ योजना के तहत परिवार के मुख्य कमाने वाले सदस्य की मौत होने पर पात्र परिवार को आर्थिक मदद दी जाती है। अन्नपूर्णा योजना के तहत ऐसे पात्र बुजुर्गों को अनाज दिया जाता है, जिन्हें वृद्धावस्था पेंशन का लाभ नहीं मिलता।
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