CJP : दिल्ली में सीजेपी नेता आशुतोष रांका और प्रवक्ता सौरव दास हिरासत में लिया गया है। दोनों समर्थकों के साथ जंतर-मंतर पर पहुंचे और नारेबाजी की, जिसके बाद पुलिस ने सभी को पकड़ा। दोनों जंतर-मंतर पर तिरंगा लहरा रहे थे जबकि दिल्ली सरकार ने कल से ही यहां प्रदर्शन करने पर प्रतिबंध लगा दिया है और दिल्ली में तीन नए स्थान बताए हैं जहां प्रदर्शन किए जा सकते हैं।
सीजेपी नेताओं ने पुलिस से प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी
बता दें कि सीजेपी के नेता सोमवार को दिल्ली के संसद मार्ग थाने पहुंचे थे। उन्होंने पुलिस से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए तारीख और समय तय करने को कहा था। पार्टी ने 24 घंटे के भीतर जवाब देने की मांग की थी। सौरव दास ने कहा था कि शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करना हर नागरिक का हक है और पुलिस को इसमें रोक-टोक नहीं करनी चाहिए। वहीं, आशुतोष रांका ने कहा था कि अगर 24 घंटे में जवाब नहीं मिला तो पार्टी आगे के आंदोलन की तारीख का ऐलान करेगी। इसके थोड़ी देर बाद दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की लिस्ट से हटा दिया। गृह मंत्रालय की बनाई कमेटी की सिफारिश पर दिल्ली का रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली का ब्ठक् ग्राउंड प्रदर्शन स्थल बनाए गए।
2 दिन पहले ही 50 हजार के मुचलके पर छूटे थे
सौरव दास व आशुतोष रांका को सीजेपी फाउंडर अभिजीत दीपके के साथ 10 अक्टूबर को दिल्ली एयरपोर्ट पर फ्लाइट से ही पुलिस ने हिरासत में लिया था। तीनों को 11 अक्टूबर को दिल्ली कैंट की विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट अदालत में पेश किया गया। इसके बाद उन्हें 50-50 हजार रुपये के जमानती मुचलके पर रिहा कर दिया गया। रिहाई की शर्त के मुताबिक, तीनों को एक साल तक शांति बनाए रखनी होगी और ऐसा कोई काम नहीं करना होगा, जिससे शांति भंग हो।
सीजेपी के निशाने पर मुख्य चुनाव आयुक्त
सीजेपी मुख्य चुनाव आयुक्त को एसआईआर पर 14 बार आपत्ति को लेकर कॉकरोच पार्टी पहले से ही सवाल उठा रही है। दोनों आयुक्तों ने वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने, हटाने और बहाल करने की प्रक्रिया के साथ चुनावी डेटा और सॉफ्टवेयर से जुड़े मामलों पर सवाल उठाए। एक मामले में फॉर्म-6 में एसआईआर से जुड़ा सवाल जोड़ने पर दोनों चुनाव आयुक्तों ने आपत्ति जताई थी।
कॉकरोच जनता पार्टी ने 20 जून से 25 जुलाई तक नीट पेपर लीक मामले में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के लिए प्रदर्शन किया था। 36 दिन तक चले इस प्रदर्शन के दौरान एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक भी भूख हड़ताल पर बैठे थे। 20 जुलाई को पार्टी ने संसद तक का मार्च भी किया था। 25 जुलाई को प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रदर्शन खत्म हो गया था।
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