Mosque Demolised : यूपी के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित एक 70 साल पुरानी मस्जिद को अवैध बताते हुए ढहाया गया है। जिला प्रशासन की इस कार्रवाई को लेकर विपक्ष योगी सरकार भडका हुआ है। विपक्षी नेताओं ने योगी सरकार को घेरते हुए मस्जिद गिराने की कार्रवाई की निंदा की है।
विपक्ष के नेताओं ने दी प्रतिक्रिया
समाजवादी पार्टी सांसद इकरा बोलीं- लोकतंत्र का गला घोंटा गया है, कानून की धज्जियां उड़ाई गईं है। वहीं समाजवादी प्रमुख अखिलेश यादव बोले- सच्चा हिंदू कभी दूसरों का अपमान नहीं करता। एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन औवेसी ओवैसी ने पूछा- मनगढ़ंत वजहों के नाम पर बुलडोजर क्यों चल रहा? क्या अब अल्पसंख्यकों को अपनी इबादतगाहों में भी इजाजत नहीं होगी। दूसरी ओर बहुजन समाजवादी पार्टी अध्यक्ष मायावती ने सोशल मीडिया पर अपने लंबे पोस्ट में यूपी सरकार से बोलीं- सहारनपुर में सरकार तुरंत एक्शन रुकवाए। जल्दबाजी में कार्रवाई करना ठीक नहीं है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद बोले- आज हमारे लिए काला दिन, मस्जिद गिराकर ठीक नहीं किया। हमारी लड़ाई दस्तावेजों के आधार पर है। हम पीछे नहीं हटेंगे। हम हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे। चुनाव हारना और जितना अलग विषय है। ये काम बीजेपी कर सकती है। हम लोग अमन पसंद लोग हैं। लोगों में प्रेम और भाईचारा देखना चाहते हैं। हमें लड़ाई और झगड़ा पसंद नहीं है।
6 बुलडोजर मस्जिद को तोड़ने में जुटे
यूपी में सहारनपुर के कलेक्ट्रेट परिसर में 70 साल पुरानी मस्जिद ढहाई जा रही है। शनिवार तड़के 4 बजे से 6 बुलडोजर मस्जिद को तोड़ने में जुटे हैं। एहतियात के तौर पर 5 कंपनी PAC, RAF और पुलिस के 200 जवान तैनात हैं। पुलिस किसी को मस्जिद के पास जाने नहीं दे रही है। फिलहाल मस्जिद का 70 फीसदी हिस्सा तोड़ा जा चुका है। कार्रवाई मजिस्ट्रेट के आदेश पर हो रही है। कोर्ट ने मस्जिद को अवैध बताया था। इससे पहले, शुक्रवार रात 11 बजे अफवाह फैली कि प्रशासन मस्जिद को तोड़ने जा रहा है। इसके बाद भारी भीड़ जुट गई थी। तुरंत ही प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। लोगों को हटाया।
पूरा मामला –
- मस्जिद 3300 स्क्वायर फीट में बनी हुई थी। दो मंजिला मस्जिद में 2 बड़े हॉल समेत 5 कमरे थे। ग्राउंड फ्लोर पर एक बड़ा हॉल और दो कमरे थे। पहली मंजिल पर हॉल के साथ एक बड़ा कमरा था। कमरे में डाकघर चलता था।
- 10 फरवरी 2025 को बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने मस्जिद को अवैध बताते हुए डीएम से शिकायत की थी। मस्जिद परिसर के कमरों और डाकघर से किराया वसूले जाने का आरोप लगाया गया। इसके बाद डीएम ने मजिस्ट्रेट को जांच के आदेश दिए। जांच में मस्जिद अवैध पाई गई।
- 24 मार्च, 2025 को प्रशासन ने नगर मजिस्ट्रेट कोर्ट में याचिका दायर की। 16 जुलाई, 2026 को कोर्ट ने मस्जिद को अवैध माना और उसे हटाने के साथ 6.41 करोड़ रुपए की हर्जाना वसूलने का आदेश दिया। कब्जेदारों को 30 दिन का समय दिया।
- 20 जुलाई को मस्जिद पक्ष ने मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ जिला कोर्ट में याचिका दाखिल की। 24 जुलाई को जिला कोर्ट ने मजिस्ट्रेट के फैसले पर स्टे देते हुए सुनवाई आगे बढ़ाई। 2 सितंबर को जिला जज सतेंद्र कुमार की कोर्ट ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखते हुए मस्जिद पक्ष की याचिका खारिज कर दी।
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