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पाक प्रधानमंत्री के बिगड़े बोल- कश्मीर पर रुख नहीं बदलेगा, सिंधु जल रोकने पर मुंहतोड़ जवाब देंगे

Pak PM Shahbaz

Shahbaz : पाकिस्तान ने कहा है कि उसका कश्मीर के प्रति रुख कभी नहीं बदलेगा। इस्लामाबाद में हुए एक कार्यक्रम में पाक प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि कश्मीर पर पाकिस्तान का रुख नहीं बदलेगा और कश्मीरियों की कुर्बानी बेकार नहीं जाने दी जाएगी। बता दें कि पाकिस्तान भारत के कश्मीर को हमेशा विवादस्पद क्षेत्र बताता रहा है और वहां जनमत की मांग करवाता रहा है। अपने भाषण में वहीं एक बार फिर से शहबाज ने भारत के साथ सिंधु जल समझौते को लेकर भारत को गीदड धमकी दी है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के हिस्से के पानी पर कोई समझौता नहीं होगा। अगर इसे रोकने या कम करने की कोशिश हुई तो उसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।

कई अंतरराष्ट्रीय मामलों पर बोले शहबाज

प्रधानमंत्री शहबाज ने अपने भाषण में कहा कि पाकिस्तान फिलिस्तीन के लोगों के अधिकारों का समर्थन करता रहेगा। अफगानिस्तान की अंतरिम सरकार से उन्होंने अपील की कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों के लिए नहीं होने दे। साथ ही दावा किया कि पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका भी निभाई है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अपने भाषण में शहबाज ने एक बार फिर सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की तारीफ करते हुए दावा किया कि उनके नेतृत्व में पाकिस्तान ने भारत को हराया।

चीन-पाकिस्तान की दोस्ती हिमालय से भी मजबूत

शहबाज ने अपने भाषण में चीन-पाकिस्तान की दोस्ती को हिमालय से भी बुलंद बताया। उन्होंने कहा कि चीन पाकिस्तान का अजीम दोस्त है। हर मुश्किल घड़ी में वह चट्टान की तरह हमारे देश के साथ रहा है।

ट्रम्प ने कराया था युद्धविराम

शहबाज शरीफ ने अपने भाषण में फिर दावा किया कि मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष रोकने में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की अहम भूमिका रही थी। उन्होंने ट्रम्प की तारीफ करते हुए कहा कि उनकी पहल से समय रहते युद्धविराम संभव हो सका। हालांकि, भारत लगातार यह कहता रहा है कि संघर्ष विराम दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच सीधे बातचीत से हुआ था और इसमें किसी तीसरे देश की कोई मध्यस्थता नहीं थी।

भारत ने पहलगाम हमले के बाद सिंधु जल संधि पर रोक लगाई

सिंधु जल समझौता समझौता भारत-पाकिस्तान के बीच नदियों के पानी का बंटवारा करता है। 19 सितंबर 1960 को भारत के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान ने इस पर दस्तखत किए थे। इसके जरिए सिंधु जल प्रणाली में पूरब की 3 नदियों का पानी भारत को और पश्चिम की 3 नदियों का पानी पाकिस्तान को देना तय हुआ था।

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