Pawan Khera: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने पलटवार किया है. उन्होंने कहा कि वे(अमित शाह) अब मुहूर्त तय करेंगे? क्यों? क्या वे ‘शहंशाह’ हैं? वे केवल अमित शाह हैं, शहंशाह नहीं हैं.. आप कौन होते हैं एजेंडा तय करने वाले या मुहूर्त निकालने वाले? हम पिछले 18 दिन से यहां संघर्ष कर रहे हैं. कि आप (अमित शाह) आइये, छात्रों पर जवाब दिजिए, चंदा चोरी पर जवाब दिजिए, आज कह रहे हैं कि मैं 3 बजे से बैठूंगा.
“इस तरह की बातों को करने का कोई फायदा नहीं”
वहीं कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर कहा कि आखिरी दिन में इस तरह की बातों को करने का कोई फायदा नहीं है. अगर बयान देना है तो पहले से जब मांग की जा रही थी, तभी आप ये बात रख देने. जब सरकार चाहती थी कि चर्चा हो तो वे इस बात को(सदन के सामने) रख सकते थे. छात्रों के साथ जो हुआ, उसके साथ-साथ राम मंदिर के चंदा चोरी विषय पर चर्चा हो यही मांग थी लेकिन वे तैयार नहीं थे. यदि वे करना चाहते तो पहले से ही चर्चा हो सकती थी.
“जो गुब्बारा फट चुका है, वो लोगों को नजर ना आए”
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि सरकार और विशेष तौर पर गृह मंत्री, एक ऐसा भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं कि सदन के अंदर शिक्षा पर, जंतर-मंतर पर या छात्र आंदोलन को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई. मैं उन्हें याद दिलाना चाहता हूं कि जब पेपर लीक को लेकर बिल लाया गया था तो दो दिन विस्तार से चर्चा हुई थी. उस दो दिन की चर्चा में राहुल गांधी ने भाग लिया, विपक्ष ले भाग लिया, भाजपा के भी कई नेताओं ने भाग लिया. उस दो दिन की चर्चा में अमित शाह क्यों अनुपस्थित थे? वे बस आकर अपना बयान दें, क्योंकि केवल वे ही बता सकते हैं कि आंसू गैस दागने का, पैलेट गन चलाने का निर्देश किसने दिया? वे बहाना बनाना चाहते हैं ताकि वे सदन के अंदर ना आएं, ताकि राहुल गांधी के कहने के मुताबिक जो गुब्बारा फट चुका है, वो लोगों को नजर ना आए. केंद्रीय गृह मंत्री बयान नहीं देना चाहते हैं, वे बयान देने से कतराते हैं. उनका बयान बाकी है और वे उसी से कतरा रहे हैं. बहाना बनाकर सदन से वे भागने का प्रयास कर रहे हैं.
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