Congress : पुष्कर रोड स्थित लगभग 15 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित अत्याधुनिक आयुर्वेद रसायनशाला को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत निजी संस्था को सौंपे जाने की कथित तैयारी को लेकर अजमेर शहर जिला कांग्रेस कमेटी ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस ने इसे जनता के धन से बनी सरकारी संपत्ति का निजीकरण बताते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
15 करोड़ की परियोजना वर्षों तक रही निष्क्रिय’
अजमेर शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डॉ. राजकुमार जयपाल ने प्रेस वार्ता में कहा कि करीब 15 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस अत्याधुनिक आयुर्वेद रसायनशाला में 75 से अधिक आधुनिक मशीनें स्थापित की गई थीं। यहां 191 प्रकार की आयुर्वेदिक औषधियों के निर्माण और पैकेजिंग की व्यवस्था की गई थी, जिससे प्रदेशभर के लगभग चार हजार आयुष संस्थानों तक दवाइयों की आपूर्ति की जानी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की लापरवाही के कारण करोड़ों रुपये की मशीनें वर्षों तक उपयोग में नहीं लाई गईं और अब अपनी विफलता छिपाने के लिए इस संस्थान को पीपीपी मॉडल के नाम पर निजी संस्था को सौंपा जा रहा है।
‘सरकारी संस्थानों को पहले कमजोर, फिर निजी हाथों में सौंपा जाता है’
डॉ. जयपाल ने कहा कि विभाग के मुख्य द्वार पर निजी संस्था का नाम प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया है, जबकि सरकारी विभाग का नाम गौण कर दिया गया है। उनके अनुसार इससे सरकार की मंशा स्पष्ट होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले सरकारी संस्थानों को जानबूझकर कमजोर किया जाता है, फिर उन्हें घाटे का हवाला देकर निजी हाथों में सौंप दिया जाता है। कांग्रेस इस फैसले का हर स्तर पर विरोध करेगी और आवश्यकता पड़ने पर सड़क से सदन तक आंदोलन करेगी।
‘राजस्थान की आयुर्वेदिक दवा आपूर्ति का प्रमुख केंद्र था संस्थान’
कांग्रेस प्रवक्ता शैलेश गुप्ता ने कहा कि यह आयुर्वेद रसायनशाला कभी राजस्थान में आयुर्वेदिक दवाइयों की आपूर्ति का महत्वपूर्ण केंद्र थी। यदि समय रहते मशीनों का संचालन किया जाता तो यह संस्थान आयुष विभाग के लिए बड़ी उपलब्धि साबित हो सकता था। उन्होंने आरोप लगाया कि इसे जानबूझकर निष्क्रिय रखा गया और अब निजी संस्था को सौंपने की तैयारी की जा रही है।
विधानसभा अध्यक्ष से भी मांगा जवाब
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि जिस प्रकार सरकारी परिसंपत्तियों के निजीकरण को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठते रहे हैं, उसी तर्ज पर अब अजमेर की इस सरकारी रसायनशाला को भी निजी हाथों में सौंपा जा रहा है। पार्टी ने क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, विशेष रूप से राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी से इस मामले पर जनता के सामने अपना पक्ष स्पष्ट करने की मांग की है।
कांग्रेस की प्रमुख मांगें
-पीपीपी मॉडल के तहत लिए गए निर्णय की पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए। – किसी भी प्रकार के निजी हस्तांतरण पर तत्काल रोक लगाई जाए। पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। –यदि किसी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
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