Acharya Pramod Krishnam: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के प्रदर्शन पर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी लोकतंत्र को मोबोक्रेसी बनाना चाहते हैं और आंदोलन के नाम पर इस देश को अराजकता की आग में झोंकना चाहते हैं. कभी नेपाल बनाने की धमकी देते हैं, कभी बांग्लादेश बनाने की धमकी देते हैं. वो प्रधानमंत्री की मॉब लिंचिंग करना चाहते हैं, यह बहुत गंभीर बात है, यह बहुत गंभीर मुद्दा है. प्रधानमंत्री के घर का घेराव जिस तरह बांग्लादेश में हुआ, जिस तरह नेपाल में हुआ. भारत की सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क रहने की जरूरत है, पार्लियामेंट के बाहर भी और पार्लियामेंट के भीतर भी. यह बात मैं पहले भी कह चुका हूं कि राहुल गांधी एक नॉर्मल इंसान नहीं हैं और नरेंद्र मोदी से वो बहुत नफरत करते हैं, इसलिए भारत की तमाम सुरक्षा एजेंसियों को मुस्तैद रहने की जरूरत है और जो दिल्ली में कल हुआ है उसकी उच्च स्तर पर जांच की आवश्यकता है. भारत का गृह मंत्रालय, भारत की खुफिया एजेंसियां इसकी जांच करें कि जिस तरह प्रधानमंत्री के घर को घेरकर भीड़ को इकट्ठा करने के लिए आह्वान किया गया, इसके पीछे की साजिश का पर्दाफाश होना बहुत जरूरी है. इस देश ने बहुत बड़े-बड़े जख्म खाए हैं. कहीं और कोई बड़ा जख्म देने की साजिश हो रही है, मुझे ऐसा लगता है.
प्रमोद कृष्णम ने आगे कहा कि पूरे आंदोलन में सबसे अच्छी भूमिका डिंपल यादव ने निभाई है. मैं विपक्ष के नेताओं से आग्रह करना चाहता हूं कि राहुल गांधी को हटाकर नेता विपक्ष के पद पर डिंपल यादव को सुशोभित किया जाए.
“भारत को बांग्लादेश बनाना है”
वहीं संसद भवन परिसर में विपक्षी सांसदों के काले कपड़े पहनकर विरोध प्रदर्शन करने पर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि उनका दिल ही काला है. जब दिल काला है, तो कपड़े भी काला ही पहनेगा आदमी. ये जो विरोध है, ये तो एक बहाना है, भारत को बांग्लादेश बनाना है.
“क्रोकोडाइल पार्टी’रख लेना चाहिए”
उन्होंने कहा कि कल जंतर-मंतर पर जिस तरह का हुड़दंग, अराजकता, मारपीट, गाली-गलौच आपको देखने को मिली, उसमें लगता है कि वो छात्र हैं? छात्रों की पूरी मांग का समर्थन करता हूं. लेकिन, छात्रों का बहाना करके ये जो कॉकरोच जनता पार्टी है, ये सड़कों पर मगरमच्छों को उतारेगी. ये कॉकरोच जनता पार्टी नहीं है, उसे अपना नाम बदलकर ‘क्रोकोडाइल पार्टी’ रख लेना चाहिए. इस देश को अराजकता की आग में झोंकना चाहते हैं. ये सब लोग इस भारत को बदनाम करने का षड्यंत्र रच रहे हैं. इस देश के अंदर बहुत आंदोलन हुए हैं, आंदोलनों का समर्थन किया गया है. लेकिन आंदोलन के नाम पर अलगाववाद, आतंकवाद और अराजकतावाद को करने की इजाजत नहीं दी जा सकती है.
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