Food Plat : दाल, चावल, रोटी, सब्जी, अचार और रायता हमारी पारंपरिक भोजन थाली है। यह देखने में जितनी भरपूर उतनी ही स्वादिष्ट भी होती है. लेकिन जब बात सेहत और खासकर प्रोटीन की आती है, तो हमारी यही ट्रेडिशनल थाली रोज की जरूरतों को पूरा करने में पीछे छूट जाती है। चिकित्सक बताते हैं कि एक एडल्ट को रोजाना लगभग 60 ग्राम प्रोटीन की जरूरत होती है। जानते हैं कि आखिर हमारी रोज की थाली में जरुरत की प्रोटीन को कैसे पूरा करें और मौजूदा थाली में इस टारगेट को हासिल करने में क्यों चूक हो जाती है-
अपनी थाली को प्रोटीन से भरपूर कैसे बनाएं?
रोजाना 60 ग्राम प्रोटीन पूरा करना इतना भी मुश्किल नहीं है. बस अपनी थाली में छोटे-छोटे बदलाव करें-जैसे
पनीर और टोफू- अपने दोपहर या रात के खाने में 50-100 ग्राम पनीर या टोफू शामिल करें.
सोयाबीन- सोया चंक्स प्रोटीन का पावरहाउस हैं. इनकी सब्जी या पुलाव बनाकर खाएं.
सत्तू और छाछ- गर्मियों में सत्तू का शरबत और खाने के साथ गाढ़ी छाछ या दही का इस्तेमाल बढ़ाएं.
अंडे और लीन मीट- अगर आप नॉन-वेजिटेरियन हैं, तो उबले अंडे और ग्रिल्ड चिकन को अपनी डाइट का हिस्सा बनाएं।
अभी की थाली में इसलिए जरुरत का प्रोटीन नहीं है क्योंकि –
कार्बाेहाइड्रेट की बहुत ज्यादा मात्रा
हमारी थाली का सबसे बड़ा हिस्सा रोटी, चावल, पोहा या आलू जैसी चीजों से घिरा होता है। ये सभी चीजें कार्बाेहाइड्रेट्स का मुख्य स्रोत हैं, जो हमें तुरंत एनर्जी तो देती हैं, लेकिन इनमें प्रोटीन की मात्रा बहुत कम होती है. अमूमन भारतीय घरों में थाली का 70 से 80 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ कार्ब्स से भरा होता है, जिससे प्रोटीन के लिए जगह ही नहीं बचती। हमारे यहां माना जाता है कि रोज दाल-चावल खा लिया, तो प्रोटीन की कमी नहीं होगी. लेकिन ऐसा नहीं है. दालों में लगभग 20 प्रतिशत प्रोटीन होता है, और इसके साथ भारी मात्रा में कार्बाेहाइड्रेट भी होता है. अगर कोई सिर्फ दाल से अपने दिनभर का 60 ग्राम प्रोटीन का टारगेट पूरा करना चाहे, तो उसे दिन में 7 से 8 कटोरी दाल पीनी पड़ेगी, जो हजम करना नामुमकिन है. इसके अलावा, हमारे प्रोटीन का 60 प्रतिशत हिस्सा गेहूं और चावल से आता है, जिसे हमारा शरीर पूरी तरह और आसानी से सोख नहीं पाता।
वेजिटेरियन खाने में ‘कम्पलीट प्रोटीन’ की कमी
जैसा कि सभी जानते हैं कि भारत की एक बहुत बड़ी आबादी शुद्ध शाकाहारी है. चिकन, मटन, मछली और अंडों में ‘कम्पलीट प्रोटीन’ होता है, जो शरीर आसानी से सोख लेता है. इसके विपरीत, शाकाहारी स्रोतों जैसे अनाज और बीन्स को शरीर पूरी तरह से इस्तेमाल नहीं कर पाता. जब तक आप अनाज और दालों को सही रैशीओ में मिलाकर (जैसे खिचड़ी या दाल-चावल) न खाएं, तब तक शरीर को सही प्रोटीन नहीं मिलता.
पकाने का ट्रेडिशनल तरीका
भारतीय खाना बनाने का तरीका ऐसा है जिसमें मसालों को खूब भूनना और सब्जियों व दालों को देर तक उबालना शामिल है. बहुत ज्यादा तापमान पर बार-बार खाना पकाने और गर्म करने से भोजन में मौजूद प्रोटीन और अन्य जरूरी पोषक तत्वों की क्वालिटी कम हो जाती है।
स्नैक्स में अनहेल्दी चीजें चुनना
हम सुबह और रात के खाने पर तो ध्यान दे देते हैं, लेकिन शाम की नाश्ते में हमारा झुकाव समोसा, कचौरी, बिस्कुट, नमकीन या चाय पर जाकर टिक जाता है. इन स्नैक्स में सिर्फ मैदा, तेल और चीनी होती है. अगर इसकी जगह मुट्ठी भर मूंगफली, मखाना, भुना चना या उबला अंडा शामिल किया जाए, तो प्रोटीन का टारगेट आसानी से पूरा हो सकता है।
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