Chines Companies : भारत सरकार ने चीनी कंपनियों को बडी राहत दी है। अब कोई भी चीनी कंपनी पावर प्रोजेक्ट में बिना रजिस्ट्रेशन के भी बोली में हिस्सा ले सकती है। हालांकि अभी सिर्फ चीन की चार कंपनियों को ही इसकी छूट मिली है। सरकार ने चार चीनी कंपनियों को अगले 2 साल तक भारत के पावर प्रोजेक्ट्स के टेंडर में बिना रजिस्ट्रेशन भी बोली लगाने की छूट दे दी है।
क्यों लिया ऐसा निर्णय
भारत सरकार ने उक्त निर्णय लेने का एक कारण यह माना जा रहा है कि चीन से जो उपकरण आयात होते हैं उनका पावर प्रोजेक्ट में भी उपयोग होता है ऐसे में सरकार का मानना है कि देश में पावर प्रोजेक्ट्स के लिए जरूरी इक्विपमेंट की कमी नहीं होनी चाहिए। अगर जरूरी सामान समय पर नहीं मिला, तो कई बिजली परियोजनाओं की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। इसी वजह से ये राहत सिर्फ 2 साल के लिए दी गई है। दरअसल फरवरी 2023 में भारत सरकार ने सीमावर्ती देशों की कंपनियों के लिए नियम सख्त कर दिए थे. इसके बाद ऐसी कंपनियों के लिए सरकारी टेंडर में हिस्सा लेना आसान नहीं रह गया था. कई मामलों में रजिस्ट्रेशन और दूसरी मंजूरियां जरूरी कर दी गई थीं। लेकिन अब सरकार ने पावर सेक्टर की जरूरत को देखते हुए एक खास फैसला लिया है. इस फैसले के तहत सिर्फ चार चीनी कंपनियों को अगले दो साल तक बिना रजिस्ट्रेशन टेंडर में हिस्सा लेने की छूट दी गई है।
नोटिफिकेशन जारी
वित्त मंत्रालय ने नोटिफिकेशन जारी करके चार कंपनियों को राहत देने का फैसला किया है. देश में लगातार नए पावर प्रोजेक्ट्स बन रहे हैं. बिजली की मांग भी तेजी से बढ़ रही है. ऐसे में ट्रांसफॉर्मर, पावर केबल, सोलर इनवर्टर और पावर स्टेशन इक्विपमेंट जैसे सामान की जरूरत पहले से ज्यादा हो गई है। मंत्रालय के अनुसार अगर ये इक्विपमेंट समय पर नहीं मिलेंगे, तो कई बिजली परियोजनाएं बीच में अटक सकती हैं. इसका असर पूरे पावर सेक्टर पर पड़ सकता है. सरकार इसी स्थिति से बचना चाहती है।
किन कंपनियों को मिली छूट
सरकार ने जिन चार कंपनियों को राहत दी है, उनमें एनर्जी इंडिया, नानजिंग इलेक्ट्रिक इंडिया, न्यू नॉर्थईस्ट इलेक्ट्रिक इंडिया और ताइकाई इलेक्ट्रिक (इंडिया) शामिल हैं। इन चारों कंपनियों की सबसे बड़ी खासियत ये है कि इनकी भारत में ही मैन्युफैक्चरिंग यूनिट है. यानी ये भारत में ही कई तरह के पावर इक्विपमेंट तैयार करती हैं। ये कंपनियां ट्रांसफॉर्मर बनाती हैं. पावर केबल बनाती हैं. सोलर इनवर्टर तैयार करती हैं. इसके अलावा पावर स्टेशन में इस्तेमाल होने वाले कई जरूरी इक्विपमेंट भी बनाती हैं। यानी बिजली परियोजनाओं के लिए जिन मशीनों और उपकरणों की जरूरत होती है, उनमें इन कंपनियों की अहम भूमिका रही है.
पहले से ही भारत में सक्रिय है कंपनियां
इन कंपनियों का भारत के पावर सेक्टर से नया रिश्ता भी नहीं है. ये पहले भी पावर ग्रिड, एनटीपीसी, एनएचपीसी और अलग-अलग पावर डिस्कॉम को इक्विपमेंट सप्लाई करती रही हैं. यानी सरकारी बिजली कंपनियों के साथ इनका पहले से कामकाज रहा है। अब सरकार ने इन्हें दो साल के लिए बिना रजिस्ट्रेशन टेंडर में हिस्सा लेने की अनुमति दे दी है।
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