ShivSena (UBT) : शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अपनी पार्टी की टूटने पर कहा इसके लिए भाजपा को दोषी ठहराया है। उद्वव ने कहा कि बाल ठाकरे की बनाई शिवसेना ने 30 साल तक कांग्रेस से लड़ाई लड़ी। लेकिन कांग्रेस ने कभी शिवसेना को खत्म करने या उसका नाम छीनने की कोशिश नहीं की। मुंबई के भांडुप में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा- शिवसेना ने जिस भाजपा को उसके शुरुआती दौर में आगे बढ़ने में मदद की, आज वही शिवसेना तोड़ने का पाप कर रही है। भाजपा दूसरों के बच्चे चुराने का काम करती है। दरअसल उद्धव ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान का जवाब दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि अब केवल एक ही शिवसेना है और उसका नेतृत्व एकनाथ शिंदे कर रहे हैं।
मेरे नतृत्व में असली शिवसेना
उद्वव ठाकरे ने कहा, ‘मेरे नेतृत्व वाली शिवसेना ही असली और एकमात्र शिवसेना है। छह सांसदों की बगावत के बावजूद मैं निराश नहीं हूं।’ रिपोर्ट्स के मुताबिक, 6 बागी सांसद आज शिंदे गुट में शामिल हो सकते हैं।
गद्दारों की वजह से नया जोश आया
शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों के बगावती रुख के बीच उद्धव ठाकरे ने कहा कि मैं बिल्कुल निराश नहीं हूं। भाजपा अपने घर की चिंता करे। 17 जून को दिल्ली में हुई पार्टी की संसदीय दल की बैठक में छह सांसद शामिल नहीं हुए थे। बता दें कि रविवार को इनमें से कम से कम दो सांसदों ने शिंदे गुट में जाने की पुष्टि भी की।
उद्धव ठाकरे ने कहा कि पार्टी छोड़ने वालों को धन्यवाद देना चाहिए, क्योंकि उनकी वजह से कार्यकर्ताओं में नया जोश पैदा हुआ है। अब पार्टी को और मजबूती के साथ आगे बढ़ाना है। अविभाजित शिवसेना हमेशा से मुंबई उत्तर-पूर्व लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ना चाहती थी, लेकिन भाजपा के साथ गठबंधन के कारण यह सीट उसके खाते में जाती थी। गठबंधन टूटने के बाद शिवसेना (यूबीटी) ने यह सीट कांग्रेस से लेकर जीती थी। हमें इस सीट को दोबारा जीतना है और इसका बदला लेना है। उद्धव ठाकरे ने कहा कि पाला बदलने वाले सांसदों को टिकट देना उनकी गलती थी और वे इसके लिए जनता से माफी मांगते हैं। उद्धव ने आरोप लगाया कि भाजपा ने शिवसेना को तोड़ने की साजिश रची।
6 बागी सांसदों में से दो रविवार को सामने आए
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना के बागी 6 सांसदों में से दो रविवार को सामने आए। धराशिव के सांसद ओमराजे निम्बालकर ने पुणे में कार्यकर्ताओं के साथ एक बैठक में ऐलान किया कि वह एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल होंगे। दूसरी ओर हिंगोली से सांसद नागेश पाटिल आष्टीकर ने सोशल मीडिया के जरिए अपना रुख साफ किया है। उन्होंने कहा- मैं पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे से बिल्कुल भी नाराज या परेशान नहीं हूं। बगावत का मुख्य कारण निर्वाचन क्षेत्र का विकास और धन की कमी है।
बागी सांसदों का कहना है- अस्तित्व बचाने के लिए अलग हुए
पार्टी के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसदों ने बगावत कर दी थी। 17 जून को बागी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को लेटर सौंपकर खुद को अलग समूह के रूप में मान्यता देने की मांग की थी। सांसदों ने चिट्ठी में उद्धव से अलग होने की वजह बताते हुए दावा किया है कि ठाकरे गुट के सीनियर नेता शिवसेना का विलय कांग्रेस में करना चाहते थे। उद्धव विचारधारा बदल चुके हैं। पार्टी का अस्तित्व बचाने के लिए हम अलग हो रहे हैं।
पार्टी में 4 साल में दूसरी बार टूट
जून 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में 39 विधायकों ने बगावत कर शिवसेना को दो हिस्सों में बांट दिया था। इसके बाद चुनाव आयोग ने शिंदे गुट को शिवसेना नाम और धनुष-बाण चुनाव चिह्न दिया था। अब 6 सांसदों की बगावत पिछले चार साल में पार्टी के लिए दूसरी बड़ी टूट है।
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