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शहरों में बढ़ता अकेलापन की वजह एक नहीं अनेक हैं, कहीं आप भी तो नहीं.. ?

Loneliness
Loneliness : अकेलेपन का मतलब अकेला रहना नहीं होता है बल्कि अकेलापन महसूस करना होता है। सरल शब्दों में कहें तो आप अपने लोगों या दोस्तों के बीच रहते हुए भी अकेलापन महसूस कर सकते हैं, यह भी हो सकता है काम से शहर से दूर किसी फ्लैट पर अकेले रहते हैं और फिर भी आपको अकेलापन महसूस न हो।

अकेलापन भी एक मानसिक बीमारी?

विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार अकेलापन अपने आप में मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम नहीं है बल्कि यह एक अनुभव है। लेकिन इसमें कोई शक नहीं है कि अकेलापन अनुभव होना डिप्रेशन, स्ट्रेस और एंग्जायटी जैसे मेंटल हेल्थ डिसऑर्डर से गहराई से जुड़ा होता है। सरल शब्दों में कहें तो अकेलेपन को आप कोई मानसिक बीमारी तो नहीं कह सकते हैं, लेकिन इसे कई बड़ी मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य होने का खतरा काफी हद तक बढ़ जाता है।

शहरों में अकेलापन क्यों बढ़ रहा है?

दरअसल अकेलापन होने के कोई एक नहीं बल्कि कई अलग-अलग फैक्टर हैं, जैसे –
– शहरों में लोगों का लाइफस्टाइल ज्यादा बिजी होता है और आपस में घुलने-मिलने का समय नहीं मिल पाता है।
– शहरों में ज्यादातर लोग अलग-अलग राज्यों से आकर रहते हैं और ज्यादातर किराए पर होते हैं जिसके कारण आस-पड़ोस में तालमेल नहीं हो पाता है
– दिल्ली जैसे शहरों में कार्पाेरेट जॉब सिस्टम है, जिसमें लोग प्रोफेशनल रहते हैं जिससे पर्सनल कॉन्टेक्ट्स ज्यादा बन नहीं पाते हैं।
– शहरों में शॉर्ट व लॉन्ग वीडियो, वीडियो गेम और टीवी का क्रेज ज्यादा बढ़ रहा है, जिसके कारण सोशल कनेक्शन नहीं बन पा रहे हैं।
इनके जैसे और भी कई इसी तरह कारण हैं, जिनके कारण शहरों में रहने वाले लोगों में अकेलापन बढ़ रहा है और क्रोनिक लोनलीनेस के कारण लोग लगातार बीमार पड़ते जा रहे हैं।

अकेलेपन से नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज का खतरा

WION Health Pulse के दूसरे सेशन में इंटरव्यू के दौरान Senior Consultant Psychiatrist and In Charge of the Institute of Mental Health & Life Skills Promotion at Moolchand Medcity ने बताया कि भारत के शहरी इलाकों की यंग जनरेशन अपनी करियर लाइफ में तो खूब तरक्की कर रही है, लेकिन अकेलेपन का बढ़ता दबाव लगातार उनकी मानसिक और शारीरिक हेल्थ को खराब कर रहा है। इस बारे में आगे डॉ. ने बताया कि भारत में इसी कारण से नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज का खतरा तेजी से बढ़ता जा रहा है। भारतीय संस्कृति में परिवार हर व्यक्ति के लिए उसका सबसे बड़ा सपोर्ट होता है और एक परिवार के रूप में हम अपने बच्चों को खूब तरक्की करने के लिए मोटिवेट करते हैं। लेकिन क्या सिर्फ ऊंचे लक्ष्य पाने के लिए ही अपने बच्चों को प्रेरित कर रहे हैं या फिर एक अच्छा जीवन जीने के लिए भी प्रेरित कर रहे हैं, हम सबको खुद से यह सवाल जरूर पूछना चाहिए।

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