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शनि जयंती कब मनाई जाएगी, जानिए तिथि, पूजा-विधि और आरती

Shani jayanti when

Shani : शनि जयंती का पर्व भगवान शनिदेव की पूजा-अर्चना को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ अमावस्या तिथि पर सूर्यपुत्र शनिदेव का जन्म हुआ था, इसलिए इस दिन शनि जयंती मनाई जाती है। इस अवसर पर भक्त शनिदेव की विशेष पूजा, व्रत और दान-पुण्य करते हैं, जिससे जीवन में चल रही परेशानियां, शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या के कष्ट कम होने की मान्यता हैं। इस साल शनि जंयती 16 मई को मनाई जाएगी।

शनि जयंती 2026

फ्यूचर पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि 16 मई की सुबह 5 बजकर 11 मिनट पर शुरू होगी और तिथि का समापन 17 मई को अर्धरात्रि में रात 1 बजकर 30 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में शनि जंयंती और शनि अमावस्या 16 मई को ही मनाई जाएगी।

शनि अमावस्या 2026 मुहूर्त

शनि अमावस्या के दिन सूर्योदय सुबह 5:30 बजे होगा।
ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 4:07 बजे से 4:48 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:50 बजे से 12:45 बजे तक
शनिदेव की पूजा के लिए विशेष शुभ समय: सुबह 7:19 बजे से 8:59 बजे तक

ज्योतिषीय दृष्टि से भी यह दिन खास है, क्योंकि सुबह से लेकर 10 बजकर 26 मिनट तक सौभाग्य योग रहेगा, जो जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ाने वाला माना जाता है। इसके बाद 10 बजकर 26 मिनट से शोभन योग शुरू होगा, जो पूरी रात तक रहेगा।

शनि जयंती पूजा-विधि

शनि जयंती के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ काले या नीले रंग के वस्त्र धारण करें। वहीं मंदिर जाकर शनिदेव को सरसों का तेल, काले तिल, नीले फूल, उड़द की दाल और शमी पत्र अर्पित करें। पूजा के दौरान “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप करें और शनि चालीसा या शनि स्तोत्र का पाठ करें। पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना भी शुभ माना जाता है। अंत में गरीबों और जरूरतमंदों को काले वस्त्र, तिल, उड़द और तेल का दान करें। मान्यता है कि इससे शनिदेव प्रसन्न होते हैं और जीवन की बाधाएं दूर होने की मान्यता है।

शनि देव की आरती

जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।
सूर्य पुत्र प्रभु छाया महतारी॥
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।।
श्याम अंग वक्र-दृ‍ष्टि चतुर्भुजा धारी।
नी लाम्बर धार नाथ गज की असवारी॥
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।।

क्रीट मुकुट शीश राजित दिपत है लिलारी।
मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी॥
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।।

मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी।
लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी॥
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।।
देव दनुज ऋषि मुनि सुमिरत नर नारी।
विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी॥
जय जय श्री शनि देव भक्तन हितकारी।।

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