Somnath Mandir: गुजरात के सोमनाथ में आज मंदिर के जीर्णोद्वार को 75 साल पूरे हो रहे हैं. 11 मई 1951 को स्वतंत्र भारत में नए सिरे से बनाए गए सोमनाथ मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा हुई थी. इसका उत्सव मनाने के लिए ‘सोमनाथ अमृत महोत्सव’ बनाया जा रहा है. इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2 किलोमीटर का शोड शो करते हुए सोमनाथ मंदिर पहुंचे. पीएम मोदी अमृत महोत्सव समारोहों के अंतर्गत ‘विशेष महा पूजा’ में शामिल हुए. इसके बाद ‘कुंभाभिषेक’ और ‘ध्वजारोहण’ समारोह संपन्न हुए, जो मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा और ध्वजारोहण की रस्मों का प्रतीक हैं. वैदिक मंत्रों के बीच 11 तीर्थों के जल से शिखर जल चढ़ाया गया. 90 मीटर ऊंची क्रेन की मदद से कलश को मंदिर के ऊपर रखा गया. इस अवसर पर मंदिर के ऊपर हेलीकॉप्टर से फूलों की पंखुड़ियों की वर्षा की गई. इसके साथ ही भारतीय वायु सेना की ‘सूर्य किरण’ एक्रोबेटिक्स टीम ने हवाई करतब दिखाए.
साल 2026 सोमनाथ मंदिर के लिए एक और वजह से खास है. दरअसल, साल 1026 में महमदू गजनवी ने मंदिर पर हमला कर इसे ध्वस्त कर दिया था. उस घटना को हजार साल पूरे हो गए हैं.
“ये सब भगवान सदाशिव की ही लीला है”
वहीं जनसभा के दौरान पीएम मोदी का सम्मान किया गया. प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के दौरान कहा कि आज प्रभास पाटन का पवित्र क्षेत्र एक अद्भुत प्रभा से भरा है. महादेव का ये साक्षात्कार, सौंदर्य, धरती और आसमान से हुई पुष्पवर्षा, भगवा ध्वजों की आभा, कला संगीत और नृत्य की अद्भुत प्रस्तुतियां, वेद मंत्रों का उच्चार, गर्भ गृह में हो रहा शिव पंचाक्षरी का अखंड पाठ और इस सबके साथ सागर की लहरों का जय घोष ऐसा लग रहा है जैसे ये सृष्टी एक साथ बोल रही है जय सोमनाथ. उन्होंने आगे कहा कि समय खुद जिनकी इच्छा से प्रकट होता है, जो स्वयं कालातीत हैं, जो स्वयं काल स्वरुप हैं, आज उन देवाधिदेव महादेव की विग्रह प्रतिष्ठा के हम 75 वर्ष मना रहे हैं. ये सृष्टि जिनसे सृजित होती है, जिनमें लय हो जाती है. आज हम उनके धाम के पुनर्निर्माण का उत्सव मना रहे हैं. जो हलाहल पीकर नीलकंठ हो गए, आज उन्हीं की शरण में यहां सोमनाथ अमृत महोत्सव हो रहा है. ये सब भगवान सदाशिव की ही लीला है.
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“अमृत यात्रा को अनुभव करने का शिवजी ने मौका दिया है”
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि दादा सोमनाथ के अनन्य भक्त के रूप में मैं कितनी बार यहां आया हूं, कितनी ही बार उनके सामने नतमस्तक हुआ हूं. लेकिन आज जब मैं यहां आ रहा था, तो समय की ये यात्रा एक सुखद अनुभूति दे रही थी. अभी कुछ ही महीने पहले मैं यहां आया था, तब हम सोमनाथ स्वाभिमान पर्व मना रहे थे. प्रथम विध्वंस के 1,000 वर्ष बाद भी सोमनाथ के अविनाशी होने का गर्व और आज इस आधुनिक स्वरूप की प्राण प्रतिष्ठा के 75 वर्ष, हम केवल 2 आयोजनों का हिस्सा भर नहीं बनें, हमें हजार वर्षों की अमृत यात्रा को अनुभव करने का शिवजी ने मौका दिया है.
“कोई ताकत भारत को झुका नहीं सकती”
उन्होंने कहा कि दुनिया की कोई ताकत भारत को झुका नहीं सकती. देश ने पोखरण परमाणु परीक्षण को ऑपरेशन शक्ति नाम दिया था क्योंकि शिव के साथ शक्ति की आराधना हमारी परंपरा रही है. चंद्रयाण मिशन में चंद्रमा पर जहां भारत का रोवर लैंड हुआ उस जगह का नाम भी हमने शिव शक्ति प्वाइंट रखा है क्योंकि हमारी आस्था में चंद्रमा शिव से जुड़े हैं. आज का दिन एक और वजह से भी विशेष है। 11 मई, 1998 यानी आज के ही दिन देश ने पोखरण में परमाणु परीक्षण किया था. देश ने 11 मई को पहले 3 परमाणु परीक्षण किए। हमारे वैज्ञानिकों ने भारत के सामर्थ्य को, भारत की क्षमता को दुनिया के सामने रखा। दुनिया में तूफान आ गया कि भारत कौन होता है, उसकी ये हैसियत, जो परमाणु परीक्षण करें. दुनिया भर की शक्तियां भारत को दबोचने के लिए मैदान में उतरी, अनेक प्रकार के बंधन लग गए, आर्थिक संभावनाओं के सारे रास्ते बंद कर दिए गए. 11 मई के बाद दुनिया हम पर टूट पड़ी थी। लेकिन 13 मई को फिर 2 और परमाणु परीक्षण हुए थे. उससे दुनिया को पता चला था कि भारत की राजनीतिक इच्छाशक्ति कितनी अटल है. उस समय पूरी दुनिया का दबाव भारत पर था. लेकिन अटल जी के नेतृत्व में भाजपा सरकार ने दिखाया था कि हमारे लिए राष्ट्र प्रथम है. दुनिया की कोई ताकत भारत को झुका नहीं सकती.



