Baal Vatikayen : राजस्थान की राजधानी जयपुर जिले में बाल वाटिकाओं में कार्यरत शिक्षकों को कार्यमुक्त कर दिया गया है जिससे कक्षाएं सूनी हो गई हैं। इस बाल वाटिकाओं में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत प्रवेशोत्सव के उत्साह के साथ हुई थी, वहीं दूसरी ओर पीएम श्री स्कूलों की बाल वाटिकाओं की हकीकत ने शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले के इन स्कूलों में एक अप्रैल से बाल वाटिकाएं शिक्षकविहीन हो गई हैं, क्योंकि 31 मार्च को एनटीटी शिक्षकों का अनुबंध समाप्त होने पर उन्हें कार्यमुक्त कर दिया गया।
अभिभावकों के सामने असमंजस
3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए संचालित इन बाल वाटिकाओं में प्रशिक्षित शिक्षकों की विशेष आवश्यकता होती है, लेकिन सत्र के पहले ही दिन शिक्षक नहीं होने से बच्चों की देखरेख और प्रारंभिक शिक्षा दोनों प्रभावित हो रही हैं। इससे अभिभावकों के सामने भी असमंजस की स्थिति बन गई है कि वे अपने बच्चों का प्रवेश कराएं या नहीं।
जिले में 16 स्कूल संचालित, 32 कार्मिक कार्य मुक्त
जानकारी के अनुसार राज्य में कुल 639 पीएम श्री स्कूल संचालित हैं। राजसमंद जिले में 16 ऐसे विद्यालय हैं, जहां बाल वाटिकाएं चल रही हैं। इन स्कूलों में 16 एनटीटी शिक्षक और 16 सफाई कार्मिक-कुल 32 कार्मिकों को अनुबंध समाप्त होने पर कार्यमुक्त किया गया है। राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद, जयपुर द्वारा किया गया एमओयू 31 मार्च को खत्म हो गया, जिसके बाद अनुबंध नहीं बढ़ाया गया।
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प्रबंधन के सामने चुनौती
शिक्षकों की कमी ने संस्था प्रधानों के सामने बड़ी दुविधा खड़ी कर दी है। यदि वे लेवल-1 शिक्षकों को बाल वाटिकाओं में लगाते हैं तो कक्षा 1 से 5 तक की पढ़ाई प्रभावित होती है। वहीं छोटे बच्चों को बिना शिक्षक के छोड़ना भी संभव नहीं है, जिससे स्कूलों में व्यवस्थागत संकट गहराता जा रहा है। सरकार जहां प्रवेशोत्सव के जरिए नामांकन बढ़ाने पर जोर दे रही है, वहीं जमीनी स्तर पर शिक्षकों की कमी इस लक्ष्य में बाधा बन सकती है। अभिभावक भी बिना शिक्षक वाली कक्षाओं में बच्चों को भेजने से हिचक सकते हैं।
निर्देशों का इंतजार
फिलहाल बाल वाटिकाओं में शिक्षकों की पुनर्नियुक्ति को लेकर राज्य स्तर के निर्देशों का इंतजार किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि आदेश मिलते ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। तब तक इन कक्षाओं का संचालन बिना एनटीटी शिक्षकों के ही करना पड़ रहा है।
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