Iran war effect : देश में तेल, गैस की किल्लत बढती जा रही है। ईरान और अमेरिका व इजराइल के बीच युद्व लंबा खिचता जा रहा है ऐसे में यह चर्चा है कि देश में लॉकडाउन लग सकता है । पीएम मोदी ने दो दिन पूर्व सोमवार को लोकसभा में पश्चिम एशिया युद्ध को बड़ी चुनौती बताते हुए देशवासियों से अपील की थी कि हमें कोरोना जैसी चुनौतियों के लिए तैयार रहना होगा। सवाल है कि क्या वाकई में देश में कोरोना जैसे हालात हो गए हैं? पीएम मोदी के इस बयान के क्या मायने हैं। भारत की तेल और गैस को लेकर क्या तैयारी है? इन सवालों के जवाब में अनेक मीडिया रिपोर्ट बताती हैं कि देश में फिलहाल अभी लॉकडाउन जैसे हालात नहीं हैं। हालांकि, युद्ध के लंबा खिंचने पर हालात गंभीर हो सकते हैं।
लॉकडाउन नहीं
पीएम मोदी ने इसी चुनौती पर बात करते हुए तैयार रहने को कहा था। अगर, हालात और गंभीर होते हैं तो भी कोरोना जैसा लॉकडाउन नहीं लगने वाला है। क्योंकि वो अलग महामारी थी। भारत कुछ ऐसे उपाय अपना सकता है, जैसे हमारे पड़ोसी देशों ने अपनाए हैं। इन उपायों में वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देना। सड़कों पर पेट्रोल-डीजल के बजाय इलेक्ट्रिक वाहनों पर जोर देना। सोलर एनर्जी और इंडक्शन चूल्हे के इस्तेमाल पर सरकार भी जोर दे रही है। काला बाजारी को रोकना और हालात को पैनिक बनाने वालों पर सख्त कार्रवाई करना।
भारत की क्या है तैयारी
भारत भी खाड़ी से खासतौर पर होर्मुज के रास्ते से करीब 50 फीसदी तेल और गैस की आवाजाही होती थी। मगर, अब यह सप्लाई बाधित हुई है। इसका असर भारत में भी देखने को मिल रहा है। एलपीजी गैस सिलेंडर के लिए लंबी-लंबी लाइनें देखने को मिल रही हैं। भारत ने इंडस्ट्रियल गैस सप्लाई में कटौती कर दी है और एलपीजी प्रोडॅक्शन को बढ़ा दिया है। भारत ने खाड़ी के अलावा, कई और देशों से तेल-गैस मंगाना शुरू कर दिया है। जैसा कि पीएम मोदी ने कहा है कि भारत पहले 27 देशों से तेल-गैस मंगाता था। अब यह बढ़कर 41 देशों तक जा पहुंचा है। पीएम मोदी ने यह भी कहा है कि भारत के पास अभी 53 लाख मीट्रिक टन से अधिक का स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व है और अतिरिक्त 65 लाख मीट्रिक टन के रिजर्व पर काम चल रहा है। भारत ने बीते 11 साल में अपनी रिफाइनिंग क्षमता में भी काफी बढ़ोतरी की है।
काला बाजारी-जमाखोरी की सख्त हो रही निगरानी
पीएम ने सख्त लहजे में कहा-ऐसे समय में काला बाजारी करने वाले, जमाखोरी करने वाले, एक्टिव हो जाते हैं, इसके लिए कड़ी मॉनिटरिंग जरूरी है, जहां से भी ऐसी शिकायतें आती हैं, वहां त्वरित कार्यवाही होनी चाहिए। देश की हर सरकार और देश का हर नागरिक जब मिलकर चलेंगे, तो हम हर चुनौती को चुनौती दे सकते हैं।
पूरी दुनिया में हर दिन 1.1 करोड़ बैरल का नुकसान
फर्स्ट पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने मौजूदा हालात को दशकों में सबसे ज्यादा गंभीर एनर्जी संकट करार दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, पूरी दुनिया में 1.1 करोड़ बैरल प्रति दिन तेल का नुकसान हो रहा है। 1970 के दशक के बाद से इस तरह का यह बड़ा नुकसान है। उस दौरान संकट के समय पूरी दुनिया को 50 लाख बैरल हर दिन का नुकसान हो रहा था।
लोकसभा में पीएम नरेंद्र मोदी ने ऐसे ही संकट की ओर इशारा किया था।
फिलीपींस में नेशनल एनर्जी इमरजेंसी का ऐलान
आईईए की चेतावनी के बाद से कई देशों ने अलग-अलग तरीके के कदम उठाए हैं। फिलीपींस ने तो नेशनल एनर्जी इमरजेंसी का ऐलान कर दिया हैं। राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्काेस जूनियर ने देश की ईंधन आपूर्ति के लिए श्आसन्न खतरेश् की चेतावनी दी है।
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भारत के सुदूर पड़ोसी ने ये उठाए गए हैं इमरजेंसी उपाय
फिलीपींस में सरकारी दफ्तरों में हफ्ते में चार दिन काम का इमरजेंसी उपाय अपनाया गया है। गैर जरूरी ट्रैवल पर पाबंदी लगाई गई है। एनर्जी सेविंग प्रोटोकॉल्स अपनाने की सलाह दी गई है।
इसके अलावा, तेल आपूर्ति करने वाले देशों का विकल्प पर भी काम कर रही है और रिजर्व बढ़ाने पर काम हो रहा है। देश में अभी 45 दिन का ईंधन रिजर्व स्टॉक है।
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पाकिस्तान-श्रीलंका में इमरजेंसी जैसे हालात
श्रीलंका में कुछ सेक्टरों में सार्वजनिक छुट्टियों को अनिवार्य कर दिया गया है। बांग्लादेश ने ऑनलाइन एजुकेशन को बढ़ा दिया है। निश्चित समय के लिए बिजली कटौती की जा रही है। पाकिस्तान ने भी हफ्ते में काम कम करने के समय में कटौती की है। वियतनाम में कारोबार को घर बैठे करने की सलाह दी गई है।



