Health and awarness: मच्छरों को कमरे से भगाने या मारने के लिए लगभग सभी घरों में किसी ना किसी कंपनी की कॉयल या लिक्विड या अगरबत्ती का इस्तेमाल करते हैं। हम अक्सर मच्छर अगरबत्ती या मच्छर भगाने वाले प्रोडक्ट्स जलाकर चैन की नींद सो जाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इनका धुआं हमारी सेहत पर भारी पड़ सकता है? महाराष्ट्र सरकार ने मच्छर भगाने वाली दो बड़ी अगरबत्ती कंपनियों को प्रतिबंधित कर दिया है। एक माह पहले की बात है कि जब महाराष्ट्र सरकार ने ‘मच्छर अगरबत्तियों’ की जांच में पाया कि इनमें डाइमेफ्लुथ्रिन जैसे खतरनाक केमिकल्स का इस्तेमाल हो रहा है। ये सांस के जरिए शरीर में जाकर हमारे फेफड़ों और नर्वस सिस्टम को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। सेंट्रल इंसेक्टिसाइड्स बोर्ड एंड रजिस्ट्रेशन कमेटी की मंजूरी के बिना बाजार में बिकने वाले ऐसे प्रोडक्ट्स बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा के मरीजों के लिए किसी साइलेंट किलर से कम नहीं हैं।
मच्छर अगरबत्तियों पर बैन क्यों ?
जानकारी के अनुसार कुछ अगरबत्तियों में ऐसे खतरनाक केमिकल्स पाए गए, जो उनमें उपयोग के लिए स्वीकृत नहीं हैं। ये केमिकल अगरबत्ती जलने पर सांस के जरिए शरीर में लाकर रेस्पिरेटरी सिस्टम (श्वसन तंत्र) को नुकसान पहुंचा सकते हैं। बिना सरकारी मंजूरी रजिस्ट्रेशन के प्रोडक्ट बेचे जा रहे थे, जो कानून का उल्लंघन है। लैब जांच में इनके स्वास्थ्य के लिए संभावित जोखिम की पुष्टि हुई बताया जाता है। कंज्यूमर्स को नकली और असुरक्षित प्रोडक्ट मिल रहे थे, जिससे सेफ्टी को लेकर खतरा था। इसलिए लोगों के स्वास्थ्य और नियमों को ध्यान में रखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने इस पर बैन लगाया है।
‘मच्छर अगरबत्तियों’ में केमिकल्स कितने खतरनाक हैं?
एक्सपर्ट बताते हैं कि इन अगरबत्तियों में डाइमेफ्लुथ्रिन पाया गया, जो एक सिंथेटिक कीटनाशक (पाइरेथ्रॉइड) है। इसमें मेपरफ्लुथ्रिन भी मिला, जो मच्छरों को मारने के लिए इस्तेमाल होता है, लेकिन अगरबत्ती रूप में इसके इस्तेमाल की मंजूरी नहीं है। जलने पर ये केमिकल्स धुएं के साथ हवा में फैलते हैं और सांस के जरिए शरीर में पहुंचकर रेस्पिरेटरी सिस्टम को नुकसान पहुंचाते हैं।
धुएं का लंग्स और ओवरऑल पर असर
एक्सपर्ट के अनुसार अगरबत्ती के खतरनाक केमिकल्स धुएं के साथ हवा में फैलते हैं। यह धुआं सांस के जरिए लंग्स में पहुंचता है और रेस्पिरेटरी सिस्टम को इरिटेट करता है। इससे खांसी, गले में जलन और सांस लेने में परेशानी हो सकती है। छोटे कण फेफड़ों में इंफ्लेमेशन पैदा करते हैं। लंबे समय तक एक्सपोजर से अस्थमा और एलर्जी का खतरा बढ़ सकता है। इससे फेफड़ों में जलन, एलर्जी, खांसी और सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। लंबे समय तक संपर्क से नर्वस सिस्टम डैमेज का खतरा बढ़ सकता है। यह धुआं शरीर के नर्वस सिस्टम पर भी असर डाल सकता है, जिससे सिरदर्द या चक्कर आ सकते हैं।
किन लोगों को नुकसान हो सकता है
बच्चे- उनके लंग्स डेवलपिंग स्टेज में होते हैं, तो धुआं ज्यादा नुकसान करता है।
बुजुर्ग- कमजोर इम्यूनिटी और पहले से मौजूद बीमारियों के कारण रिस्क ज्यादा होता है।
अस्थमा मरीज- जिन्हें क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज और अस्थमा जैसी सांस संबंधी बीमारियां हैं, उनके लिए अगरबत्ती का धुआं ज्यादा नुकसानदायक है।
एलर्जेटिक लोग– केमिकल्स से एलर्जिक रिएक्शन बढ़ सकता है।
गर्भवती महिलाएं- धुआं प्रेग्नेंट महिला और गर्भस्थ शिशु, दोनों की सेहत को प्रभावित कर सकता है।
हार्ट पेशेंट्स– प्रदूषित हवा हार्ट पर अतिरिक्त दबाव डालती है।
इनडोर रहने वाले लोग– बंद कमरों में धुआं ज्यादा जमा होता है, जिससे एक्सपोजर बढ़ता है।
प्रोडक्ट्स खरीदते समय चेक करना जरूरी
मच्छर भगाने वाले प्रोडक्ट्स खरीदते समय क्या चेक करना जरूरी रजिस्ट्रेशन नंबर. केवल वही प्रोडक्ट लें, जिन्हें सरकार से स्वीकृति मिली हुई है। एक्टिव केमिकल्सरू लेबल पर लिखे केमिकल्स (जैसे एल्थ्रिन आदि) की जानकारी देखें। निर्माता की जानकारी. कंपनी का नाम, पता और लाइसेंस नंबर स्पष्ट होना चाहिए। एक्सपायरी डेट. प्रोडक्ट की एक्सपायरी डेट जरूर चेक करें। इस्तेमाल के इंस्ट्रक्शनरू सही और सुरक्षित इस्तेमाल के निर्देश पढ़ें।
सावधानियां – सेफ्टी इंस्ट्रक्शन. बच्चों और पालतू जानवरों के लिए सावधानियां देखें। सील और पैकेजिंगरू नकली या खुले पैक न खरीदें।
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मच्छर भगाने के घरेलू उपाय करें
कपूर – कमरे की खिड़कियां बंद करके 20 मिनट के लिए कपूर जलाएं या खुले बर्तन में कपूर की टिकिया रखें। इसकी गंध मच्छरों को दूर भगाती है।
नीम का तेल – नीम का तेल केमिकल वेपोराइजर से अधिक प्रभावी और सुरक्षित है। इसे नारियल तेल में मिलाकर शरीर पर लगाने से मच्छर नहीं काटते हैं।
नींबू और लौंग – आधे कटे नींबू में लौंग गाड़कर कमरे के कोनों में रखें। इन दोनों की मिक्स स्मेल मच्छरों को नापसंद होती है।
लहसुन का स्प्रे- लहसुन की कलियों को पानी में उबालकर स्प्रे बोतल में भर लें। इसे घर में छिड़कने से मच्छर नहीं आते हैं।
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पुदीना (मिंट) ऑयल– पुदीने के तेल का छिड़काव करें या इसके पौधे को कमरे में रखें। इसकी तेज गंध मच्छरों को भगाने में कारगर है।
एसेंशियल ऑयल्स- लैवेंडर, टी-ट्री और सिट्रोनेला तेल को पानी में मिलाकर नेचुरल स्प्रे की तरह इस्तेमाल करें।
नीलगिरी तेल- नीलगिरी के तेल में एंटी-मॉस्किटो गुण होते हैं। इसे डिफ्यूजर में या पानी में मिलाकर छिड़कें।
तुलसी का पौधा- घर की बालकनी या आंगन में तुलसी लगाएं। इसके औषधीय गुण और सुगंध मच्छरों को रोकने में मदद करते हैं।
लेमनग्रास- इसमें सिट्रोनेला (एसेंशियल ऑयल) होता है, जो मच्छर भगाने वाले प्रोडक्ट्स का मुख्य बेस है। इसे बालकनी या बगीचे में लगाने से मच्छर अंदर नहीं आते हैं।



