Dandi March Anniversary:राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने 96 साल पहले आजादी के दिनों में औपनिवेशिक भारत में ब्रिटिश शासन के जरिए लगाए गए नमक कर के खिलाफ किए आंदोलन दांडी मार्च की आज वर्षगांठ है. डांडी मार्च की वर्षगांठ पर आज जयपुर में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व में शांति मार्च निकाला गया. जिसमें गहलोत और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा समेत कांग्रेस के कई नेता शहीद स्मारक से लेकर गांधी वाटिका तक पैदल मार्च पर निकले.
“देश में अघोषित आपातकाल का माहौल बन गया”
पूर्व सीएम गहलोत (Ashok Gehlot) ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि अंग्रेजों ने नमक पर टैक्स लगा दिया तो पूरी दुनिया में संदेश गया कि भारत में आंदोलन चल रहा है. उस समय 24 दिन की यात्रा थी आज के दिन शुरू हुई. यात्रा करीब 400 किलोमीटर थी. आज का दिन मनाने के मायने ये हैं कि हालात ऐसे बन गए हैं कि लोकतंत्र खतरे में है. देश में अघोषित आपातकाल का माहौल बन गया. वहीं जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला पर हुए हमले को लेकर जब उनसे सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि बहुत चिंताजनक स्थिति है. पुलिस की मौजूदगी में घटना हुई. शादी-विवाह के समारोह में फायरिंग होना चिंताजनक स्थिति है. पूरा देश चिंतित है. वो पक्के देशभक्त रहे हैं वो तो भजन गाते हैं राम के.
“वह आज भी हमें प्रेरणा देता है”
आज गुरुवार को ही गहलोत (Ashok Gehlot) ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि महात्मा गांधी द्वारा आज ही के दिन वर्ष 1930 में शुरू किए गए दांडी मार्च की वर्षगांठ पर उन्हें तथा समस्त सत्याग्रहियों को श्रद्धापूर्वक नमन करता हूं. तानाशाही एवं अन्याय के खिलाफ महात्मा गांधी ने बगैर झुके, सत्य और अहिंसा के बल पर संघर्ष का जो मार्ग दिखाया, वह आज भी हमें प्रेरणा देता है.
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“एक संदेश देना चाहते हैं देश देशवासियों का है”
वहीं राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा (Govind Singh Dotasara) ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि हमने मौन जुलूस निकाला हैं. एक संदेश देना चाहते हैं कि देश देशवासियों का है ना कि भाजपा और जो तानाशाह सरकार में बैठे है उनका है. 36 कौम का 144 करोड़ लोगों का देश है. उस देश की हर संपदा पर, हर सरकार पर सबका अधिकार है.
डोटासरा के अलावा नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि 12 मार्च 1930 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के नेतृत्व में प्रारंभ हुई दांडी मार्च केवल एक यात्रा नहीं थी, बल्कि अन्याय और दमन के विरुद्ध पूरे देश की आत्मा का जागरण थी. इस महान आंदोलन ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी और लाखों देशवासियों के मन में आज़ादी की ज्योति प्रज्वलित की. आज इस ऐतिहासिक दिवस पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, दांडी यात्रा के सभी सत्याग्रहियों और समस्त स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग, साहस और बलिदान को कोटि कोटि नमन करता हूं. उनका संघर्ष और संकल्प हमें सदैव राष्ट्रहित में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहेगा.



