Gas Cyllendar crises: प्रदेश के कई शहरों में गैस सिलेंडर की सप्लाई नहीं होने से भारी संकट की स्थिति है। जहां कहीं सिलेंडर उपलब्ध भी है तो वहां एक सिलेंडर के ढाई से तीन हजार रुपये तक वसूले जा रहे हैं। कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई प्रभावित होने से होटल-रेस्टोरेंट बंद होने के कगार पर है। सिलेंडर को लेकर हालात बिगड़ने लग हैं। अलवर में बुधवार सुबह भारत गैस एजेंसी के ऑफिस में जमकर हंगामा हुआ। ग्राहकों से बचने के लिए मालिक ने खुद को ऑफिस में लॉक कर लिया। कोटा में सप्लाई नहीं होने से कई मैस व हॉस्टल ने खाना बनाना बंद कर दिया है।
जयपुर में खुलेआम कालाबाजारी
जयपुर में कॉमर्शियल सिलेंडर 2500 से भी ज्यादा में बिक रहा है। इसे लेकर होटल-रेस्टोरेंट मालिक ने नाराजगी जताई है। राजधानी के त्रिवेणी नगर इलाके से खबर है कि कई रेस्टोरेंट संचालकों से सिलेंडर सप्लायर मनमानी वसूली कर रहे हैं। सिलेंडर 2500 रुपए तक में बेचा जा रहा है। गैस एजेंसियों की मनमानी से होटल-रेस्टोरेंट संचालकों में नाराजगी है।
कोटा में संकट
जानकारी के अनुसार कोटा में दो हजार से ज्यादा मैस और प्राइवेट हॉस्टल में भी परेशानी बढ़ गई है। कॉमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई प्रभावित होने के कारण कई मैस-हॉस्टल ने अपने यहां किचन बंद कर दी है। वहीं, कुछ हॉस्टल खाना बनाने के लिए इलेक्ट्रिक उपकरण या कोयले वाली भट्टी का इस्तेमाल कर रहे हैं। संचालकों का कहना है कि उन्हें काफी आर्थिक नुकसान हो रहा है।
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सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू किया
इधर, केंद्र सरकार ने गैस समेत जरूरी चीजों की जमाखोरी रोक ने लिए देशभर में आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 लागू कर दिया है। अब गैस को 4 कैटेगरी में बांटा जाएगा.
पहली कैटेगरी (पूरी सप्लाई) – इसमें घर की रसोई गैस और गाड़ियों में डलने वाली सीएनजी आती है। इन्हें पहले की तरह पूरी गैस मिलती रहेगी।
दूसरी कैटेगरी (खाद कारखाने) – खाद बनाने वाली फैक्ट्रियों को करीब 70 फीसदीः गैस दी जाएगी। बस उन्हें यह साबित करना होगा कि गैस का इस्तेमाल खाद बनाने में ही हुआ है।
तीसरी कैटेगरी (बड़े उद्योग)- नेशनल ग्रिड से जुड़ी चाय की फैक्ट्रियों और दूसरे बड़े उद्योगों को उनकी जरूरत की लगभग 80 फीसदी गैस मिलेगी।
चौथी कैटेगरी (छोटे बिजनेस और होटल) – शहरों के गैस नेटवर्क से जुड़े छोटे कारखानों, होटल और रेस्टोरेंट को भी उनकी पुरानी खपत के हिसाब से लगभग 80ः गैस दी जाएगी।
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