Health- अचानक चक्कर आ जाना या बेहोश हो जाना अक्सर लोग कमजोरी या ब्लड प्रेशर की समस्या मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन अगर यह परेशानी बार-बार होने लगे तो यह शरीर की ओर से दिया गया एक चेतावनी संकेत हो सकता है। कई बार इसके पीछे दिल, दिमाग या हार्मोन से जुड़ी गंभीर वजहें छिपी होती हैं। मेडिकल जानकारी देने वाली संस्थाओं कि रिपोर्ट्स के अनुसार बेहोशी को मेडिकल भाषा में “सिन्कोपी” कहा जाता है। यह स्थिति तब बनती है जब कुछ समय के लिए दिमाग तक पर्याप्त मात्रा में खून और ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती।
शरीर पर क्या असर पड़ता है?
डॉक्टरों का कहना है कि अचानक खड़े हो जाना शरीर का बहुत ज्यादा गर्म हो जाना अचानक तनाव महसूस होना या पानी की कमी भी बेहोशी का कारण बन सकती है। कई मामलों में यह सामान्य हो सकता है लेकिन अगर बिना किसी साफ वजह के बार-बार बेहोश हो रहे है तो इसे सामान्य नहीं माना जाता। 70 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है लेकिन आजकल युवा भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। बार-बार बेहोशी आना इस बात का संकेत हो सकता है कि शरीर के अंदर कोई गंभीर परेशानी पनप रही है।
क्या दिल की बीमारी वजह बन सकती है?
कुछ मामलों में बेहोशी का सीधा संबंध दिल से जुड़ी समस्या से हो सकता है। अगर हार्ट सही मात्रा में खून पंप नहीं कर पा रहा तो दिमाग तक ऑक्सीजन की सप्लाई कम हो जाती है और व्यक्ति अचानक बेहोश हो सकता है। दिल से जुड़ी बेहोशी अक्सर बिना किसी चेतावनी के होती है। अगर चलने-फिरने या शारीरिक गतिविधि के दौरान बेहोशी आए और साथ में सीने में दर्द, सांस फूलना या दिल की धड़कन तेज होना जैसे लक्षण दिखें तो इसे बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह आपात स्थिति हो सकती है।
बेहोशी के अन्य कारण
हर बार बेहोशी की वजह दिल ही नहीं होती। इसके पीछे कई अन्य कारण भी हो सकते हैं जैसे –
- न्यूरोलॉजिकल समस्या या स्ट्रोक
- ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन
- गंभीर एनीमिया
- ब्लड शुगर का अचानक गिरना
- हार्मोन से जुड़ी गड़बड़ी
अच्छी बात यह है कि ज्यादातर मामलों में लाइफस्टाइल में सुधार करके बेहोशी की घटनाओं को कम किया जा सकता है।पर्याप्त पानी पीना ज्यादा देर तक खड़े न रहना भीड़भाड़ से बचना और संतुलित आहार लेना इसमें मददगार साबित हो सकता है।
कब डॉक्टर से मिलना जरूरी है?
इन स्थितियों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए:
- एक से अधिक बार बेहोशी आना
- एक मिनट से ज्यादा समय तक होश न आना
- बिना किसी चेतावनी के अचानक गिर जाना
- होश आने के बाद भ्रम या कमजोरी महसूस होना
- परिवार में दिल की बीमारी का इतिहास होना
डॉक्टर जांच के लिए ब्लड टेस्ट, हार्ट मॉनिटरिंग और नर्वस सिस्टम से जुड़ी जांच कर सकते हैं ताकि सही कारण का पता लगाया जा सके। कुछ मामलों में अगर समस्या दिल से जुड़ी निकले, तो पेसमेकर लगाने की जरूरत भी पड़ सकती है।
Disclaimer-
इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी नई एक्सरसाइज या इलाज शुरू करने से पहले डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
–



