Vande Matram : वंदे मातरम गाने को लेकर एक बार फिर सरकार और मुस्लिम संगठन के बीच बयानबाजी और विरोध शुरु हो गया है. केंद्र की मोदी सरकार ने वंदे मातरम् को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए हैं. नए निर्देशों पर जमीयत उलेमा ए हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी ने कड़ा ऐतराज़ जताया है. केंद्र की मोदी सरकार के नए निर्देशों के मुताबिक अब सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों और कई महत्वपूर्ण आयोजनों में वंदे मातरम् बजाना अनिवार्य होगा और सभी लोगों को खड़े होकर इसका सम्मान करना होगा. जैसे राष्ट्रगान जन गण मन के समय किया जाता है, इसे लेकर मुस्लिम नेता इस पर ऐतराज जता रहे हैं.
जमीयत उलेमा ए हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी ने गुरुवार को एक्स पर पोस्ट कर कहा कि वंदे मातरम् को राष्ट्रीय गीत के रूप में सभी सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों, कॉलेजों और आयोजनों में इसकी समस्त पंक्तियों को अनिवार्य करना न केवल एक पक्षपाती और ज़बरदस्ती थोपा गया फैसला है, बल्कि यह संविधान में दी गई धार्मिक स्वतंत्रता पर खुला हमला और अल्पसंख्यकों के अधिकार छीनने का निंदनीय प्रयास है.
संविधान का कैसा हो रहा उल्लंघन
अरशद मदनी ने कहा कि मुसलमान किसी को वंदे मातरम् पढ़ने या उसकी धुन बजाने से नहीं रोकते, मगर क्योंकि उसकी कुछ पंक्तियां बहुदेववादी आस्था पर आधारित हैं और मातृभूमि को ईश्वर के रूप में प्रस्तुत करती हैं, जो एकेश्वरवादी धर्म की आस्था से टकराती हैं, इसलिए मुसलमान जो केवल एक अल्लाह की वंदना करता है, उसको इसे पढ़ने पर विवश करना संविधान की धारा 25 और सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसलों का खुला उल्लंघन है.
वंदे मातरम गाने को लेकर एक बार फिर सरकार और मुस्लिम संगठन के बीच बयानबाजी और विरोध शुरु हो गया है. केंद्र की मोदी सरकार ने वंदे मातरम् को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए हैं. नए निर्देशों पर जमीयत उलेमा ए हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी ने कड़ा ऐतराज जताया है. केंद्र की मोदी सरकार के नए निर्देशों के मुताबिक अब सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों और कई महत्वपूर्ण आयोजनों में वंदे मातरम् बजाना अनिवार्य होगा और सभी लोगों को खड़े होकर इसका सम्मान करना होगा. जैसे राष्ट्रगान जन गण मन के समय किया जाता है, इसे लेकर मुस्लिम नेता इस पर ऐतराज जता रहे हैं.
जमीयत उलेमा ए हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी ने गुरुवार को एक्स पर पोस्ट कर कहा कि वंदे मातरम् को राष्ट्रीय गीत के रूप में सभी सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों, कॉलेजों और आयोजनों में इसकी समस्त पंक्तियों को अनिवार्य करना न केवल एक पक्षपाती और ज़बरदस्ती थोपा गया फैसला है, बल्कि यह संविधान में दी गई धार्मिक स्वतंत्रता पर खुला हमला और अल्पसंख्यकों के अधिकार छीनने का निंदनीय प्रयास है.
’मुसलमान सिर्फ अल्लाह की इबादत करता है’
सरकार पर निशाना साधते हुए मदनी ने कहा कि आज इस गीत को अनिवार्य कर देना और नागरिकों पर थोपने का प्रयास वास्तव में देशप्रेम नहीं, बल्कि चुनावी राजनीति, सांप्रदायिक एजेंडे और जनता का ध्यान मूल समस्याओं से हटाने की सोची-समझी चाल है. मातृभूमि से प्रेम का आधार नारे नहीं, बल्कि चरित्र और बलिदान हैं, जिनका उज्ज्वल उदाहरण मुसलमानों और जमीयत उलमा-ए-हिंद का अभूतपूर्व संघर्ष है. इस प्रकार के फ़ैसले देश की शांति, एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों को कमज़ोर करने के साथ-साथ संविधान का भी उल्लंघन हैं.
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उन्होंने आगे कहा कि याद रखिए! मुसलमान केवल एक अल्लाह की इबादत करता है. हम सब कुछ बर्दाश्त कर सकते हैं, मगर अल्लाह के साथ किसी को शरीक करना कभी स्वीकार नहीं कर सकते. इसलिए वंदे मातरम् को अनिवार्य कर देना संविधान की आत्मा, धार्मिक स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर खुला हमला है.
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सरकार पर निशाना साधते हुए मदनी ने कहा कि आज इस गीत को अनिवार्य कर देना और नागरिकों पर थोपने का प्रयास वास्तव में देशप्रेम नहीं, बल्कि चुनावी राजनीति, सांप्रदायिक एजेंडे और जनता का ध्यान मूल समस्याओं से हटाने की सोची-समझी चाल है. मातृभूमि से प्रेम का आधार नारे नहीं, बल्कि चरित्र और बलिदान हैं, जिनका उज्ज्वल उदाहरण मुसलमानों और जमीयत उलमा-ए-हिंद का अभूतपूर्व संघर्ष है. इस प्रकार के फ़ैसले देश की शांति, एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों को कमज़ोर करने के साथ-साथ संविधान का भी उल्लंघन हैं.
उन्होंने आगे कहा कि याद रखिए! मुसलमान केवल एक अल्लाह की इबादत करता है. हम सब कुछ बर्दाश्त कर सकते हैं, मगर अल्लाह के साथ किसी को शरीक करना कभी स्वीकार नहीं कर सकते. इसलिए वंदे मातरम् को अनिवार्य कर देना संविधान की आत्मा, धार्मिक स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर खुला हमला है.



