Parliament Budget Session: संसद में जारी गतिरोध के बीच समाजवादी पार्टी सांसद इकरा हसन की प्रतिक्रिया आई है. उन्होंने कहा कि लोकसभा को सरकार ही चलने नहीं देना चाहती. बार-बार जो सदन को स्थगित किया जा रहा है, आज सबका बजट पर चर्चा करने का मन था. नेता प्रतिपक्ष अगर कुछ बोलना चाहते हैं तो उन्हें बोलने दिया जाए. क्यों इस तरह विपक्ष की आवाज़ को दबाया जा रहा है यह बहुत गंभीर विषय है. सरकार चारों ओर से घिरी हुई है इसलिए चर्चा नहीं चाहती. आज सदन चल सकता था लेकिन इनकी चलाने की मंशा नहीं थी. स्पीकर सदन के सरंक्षक हैं, मेरी उनसे यही गुजारिश है कि विपक्ष को अपनी बात रखने का मौका दें. सवाल होने जरूरी है अगर लोकतंत्र को हमें जिंदा रखना है इसकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी स्पीकर की है.
“डील नहीं ढील दी गई है”
समाजवादी पार्टी सांसद अखिलेश यादव ने कहा कि हम सब विपक्ष के लोग चाहते हैं कि सदन चले और उस समय तो सदन चलना और महत्वपूर्ण हो जाता है जब अमेरिका से इतनी बड़ी डील हुई है, डील नहीं ढील दी गई है. भाजपा यह भी समझा रही है कि 18 और शून्य बराबर है, इन सबके जवाब विपक्ष मांग रहा है क्योंकि बहुत दिनों के बाद बड़े पैमाने पर 1991-92 के बाद बाज़ार खुला है. सरकार को आगे आकर बहुत सी बातों को न लेकर सीधे-सीधे विपक्ष के सवाल का जवाब देना चाहिए. वहीं लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्षी पार्टियों द्वारा अविश्वास प्रस्ताव लाने पर उन्होंने कहा कि स्पीकर का अपना सम्मान है, सदन की अपनी गरिमा है. उन बातों को लेकर हमने बातचीत की है, देखिए क्या निकलता है… हमारे लिए महत्वपूर्ण है कि जिस तरह से बाज़ार खोला जा रहा है, जिस तरह से ढील दी गई है उसपर चर्चा होनी चाहिए.
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“इस तरह की नॉन-फंक्शनिंग जारी है”
कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने कहा कि यह बहुत निराशाजनक है कि इस तरह की नॉन-फंक्शनिंग जारी है. हमने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा नहीं की और ऐसा लग नहीं रहा कि हम बजट पर अपनी चर्चा शुरू कर पाएंगे. यह बहुत निराशाजनक है. सभी विपक्ष के नेता बोलने और अपनी बात रखने का मौका मांग रहे हैं और सरकार एक सेंसर बोर्ड की तरह व्यवहार कर रही है जो भाषण की अनुमति देने से पहले स्क्रिप्ट पहले से चाहती है. हम सभी खुद को वंचित और ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं.



