Ghuskhor Pandat Controversy: ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज होने वाली फिल्म घूसखोर पंडत का टीजर सामने आने के बाद से ही देशभर में हंगामा खड़ा हो गया था. राजनीतिक पार्टियों और ब्राह्मण संगठनों ने इसे समाज का अपमान बताया है. मामले पर ज्यादा विवाद बढ़ा तो यूपी के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के अनुरोध पर भारत सरकार ने फिल्म के शीर्षक को हटाने के निर्देश जारी कर दिए हैं. जिसको लेकर डिप्टी सीएम ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर एक वीडियो पोस्ट किया है जिसमें कहा कि पंडित शब्द विद्वता और त्याग का प्रतीक रहा है, ब्राह्मणों का योगदान राष्ट्र निर्माण में प्रथम पंक्ति में रहा है. ओटीटी प्लेटफॉर्म पर ब्राह्मण समाज को अनुचित तरीके से इंगित कर आगामी समय में रिलीज को प्रस्तावित घूसखोर पंडत शीर्षक फिल्म जो कि वर्ग विशेष की भावनाओं को आहत करने वाली थी, जिसके संबंध में मेरे द्वारा भारत सरकार से फिल्म के शीर्षक को हटाने का अनुरोध किया गया था.
उन्होंने आगे कहा कि भारत सरकार ने मेरे अनुरोध को स्वीकार करते हुए ओटीटी प्लेटफॉर्म पर इस शीर्षक को हटाने के सख्त निर्देश जारी करते हुए भविष्य में किसी भी वर्ग विशेष पर इस तरह की अनुचित टिप्पणी को फिल्मों, वेब सीरीज एवं अन्य माध्यमों में अमल में न लाए जाने के निर्देश दिए हैं. जिससे सामाजिक विद्वेष पनपता हो. मैं इस मांग को स्वीकार करने पर भारत सरकार का ह्रदय से आभार व्यक्त करता हूं.
“जातिगत टिप्पणी करना असंवैधानिक भी है”
घूसखोर पंडत विवाद पर भाजपा नेता अपर्णा बिष्ट यादव की भी प्रतिक्रिया आई है. उन्होंने कहा कि किसी सीरीज़ को प्रचलित करने के लिए इस तरह की असंवेदनशील बात करना या लिखना, वो भी एक ऐसे समाज के बारे में जिसने हमेशा इस पूरी दुनिया में सनातन समाज को जीवित रखा है ठीक नहीं है. हम एक ऐसे देश में रहते हैं जहां बहुत ज्यादा जातिगत टिप्पणी करना असंवैधानिक भी है. मुख्यमंत्री ने सीरीज़ के निर्माताओं के खिलाफ जो FIR करवाने का निर्णय लिया है, मैं इसका स्वागत करती हूं.
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“फिल्म का टाइटल कुछ और हो सकता था”
भारतीय लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ को लेकर हुए विवाद पर कहा यह मामला कल मेरे सामने आया और क्योंकि मैं नीरज पांडे और मनोज बाजपेयी की फैन हूं, इसलिए मुझे बहुत हैरानी हुई. मैंने कल टीज़र देखा, और उसमें इस्तेमाल की गई भाषा वैसी नहीं लगी जैसी नीरज पांडे की होती है. ऐसा लगा जैसे वह किसी तरह के दबाव में थे और इसीलिए मैंने ट्वीट करके पूछा कि क्या यह स्ट्रीमिंग पार्टनर, नेटफ्लिक्स के दबाव की वजह से था. जिसने उन्हें ऐसा प्रोपेगेंडा जैसा टाइटल चुनने पर मजबूर किया. फिल्म का टाइटल कुछ और हो सकता था, लेकिन जिस तरह से “पंडित” शब्द जोड़ा गया, उससे मुझे दुख हुआ.



