Parliament Budget Session: लोकसभा में विपक्ष की महिला सांसदों के पीएम मोदी की सीट को घेरने पर सियासत तेज हो गई है. भाजपा सांसद संजय जायसवाल ने कहा कि मैं खुद (संसद में)वहीं प्रधानमंत्री की तरफ उसी किनारे बैठता हूं. जिस प्रकार से कांग्रेस की महिला सांसदों ने उस पूरे इलाके में आने का काम किया, वो बहुत ही दुर्भावनापूर्ण है. वो(राहुल गांधी) भारत के लोकतंत्र को, संसद को भी अपने निम्न स्तर पर पहुंचाने का काम कर रहे हैं. ऐसा भारतीय संसदीय इतिहास में कभी नहीं हुआ.
“पीएम पर हमला करना आसान नहीं”
भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने कहा कि पीएम पर हमला करना आसान नहीं है लेकिन जो व्यवहार विपक्ष दिखा रहा है. ये लोकतंत्र का मंदिर है तो हम सारे नियमों का आदर कर रहे हैं लेकिन विपक्ष क्यों नहीं कर रहा है. विपक्ष लोकतंत्र की पहले भी हत्या कर चुका है. अब वो फिर से अपनी हार की निराशा में सारी चर्चाएं रोक रहे हैं हमें नए ट्रेड डील के बारे में बताने नहीं दे रहे हैं हम इसको अपने सत्यनिष्ठा से आगे बढ़ाएंगे.
“यह राहुल गांधी के चेहरे वाली कांग्रेस”
भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा कि भारतीय संसद के इतिहास में आजतक यह नहीं हुआ कि प्रधानमंत्री को बोलने से जबरन रोका जाए, घेराव किया जाए और स्पीकर को बताना पड़े कि वो(प्रधानमंत्री सदन में) ना आएं. संसद बहस की जगह है, वहां अपनी बात रखें. यह राहुल गांधी के चेहरे वाली कांग्रेस है.
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“संसद को सड़क बनाना चाहते हैं”
बीजेपी सांसद साक्षी महाराज ने कहा कि पूरा विपक्ष, खासकर राहुल गांधी, हार से इतना निराश है कि वे संसद को सड़क बनाना चाहते हैं. यह भगवान की कृपा थी कि माननीय प्रधानमंत्री उस समय वहां नहीं पहुंचे.
“यह बहुत बुरा है, यह घिनौना है”
लोकसभा में विपक्षी महिला सांसदों द्वारा PM मोदी की सीट को घेरने पर BJP सांसद अरुण गोविल ने कहा कि तैयारी साफ़ दिख रही थी, वे उस समय कुछ भी कर सकती थीं. यह बहुत बुरा है, यह घिनौना है.
“लोकतांत्रिक परंपराओं को तार तार कर देती”
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि जब सदन के नेता को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर जवाब देना था, तो मेरे पास पुख्ता ऐसी जानकारी आई कि कांग्रेस पार्टी के कई सांसद प्रधानमंत्री के आसन पर पहुंचकर कोई भी अप्रत्याशित घटना कर सकते हैं. अगर यह घटना हो जाती तो यह अत्यंत अप्रिय, देश की लोकतांत्रिक परंपराओं को तार तार कर देती. इसे टालने के लिए मैंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि उन्हें सदन में नहीं आना चाहिए.



