Rahul Gandhi Vs Ravneet Bittu: केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को लेकर राहुल गांधी की टिप्पणी पर भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि लोकसभा नेता प्रतिपक्ष केंद्र सरकार के एक जिम्मेदार मंत्री को गद्दार कहकर संबोधित करते हैं. इससे समझ आता है कि राहुल गांधी के संस्कार कैसे हैं. राहुल गांधी अपना मानसिक संतुलन खो बैठे हैं. किसी भी केंद्रीय मंत्री को विपक्ष के नेता द्वारा गद्दार कहना इससे ज्यादा अपमानजनक बात कोई नहीं हो सकती. राहुल गांधी हार और हताशा में जो उनके मन में आता है वो उस प्रकार की भाषा का इस्तेमाल करते हैं. निश्चित रूप से राहुल गांधी के इस कृत्य ने देश में विपक्ष के नेता की गरिमा को बहुत कम किया है.
“ये देश में सिखों का अपमान है”
वहीं एक अन्य सवाल के जवाब पर प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि सीधे तौर पर ये देश में सिखों का अपमान है. ये नहीं भूलना चाहिए कि रवनीत सिंह बिट्टू शहीदी परिवार से आते हैं ये केवल रवनीत सिंह बिट्टू का अपमान नहीं बल्कि समस्त सिख कौम का अपमान है. जो सिख कौम देश की रक्षा और सुरक्षा के लिए सबसे आगे खड़ी होती है.
“यह सच्चाई है कि गद्दारी की है”
केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को लेकर राहुल गांधी की टिप्पणी पर कांग्रेस नेता उदित राज की भी प्रतिक्रिया आई है. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी का दिल बहुत साफ है. उन्होंने हंसी मजाक में कहा था जिसे भाजपा ने हवा दे दी. रवनीत बिट्टू को झाड़ पर चढ़ा दिया लेकिन ऐसा नहीं करना चाहिए और इसमें चिढ़ने की क्या बात है कांग्रेस ने ही तो इनको नेता बनाया है इन्होंने(रवनीत बिट्टू) विश्वासघात किया भी है. जिस टोन में राहुल गांधी ने कहा वो मजाकिया टोन में कहा था लेकिन यह सच्चाई है कि गद्दारी की है.
“यह लोकतंत्र के लिए हानिकारक है”
वहीं भाजपा सांसद नरेश बंसल ने कहा कि राहुल गांधी को इस प्रकार के शब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए था. अगर वो ऐसे शब्दों का प्रयोग ना करते को रवनीत सिंह बिट्टू को भी जवाब देने की आवश्यकता नहीं पड़ती लेकिन उन्होंने कुछ कहा है तो फिर कुछ सुनना भी पड़ेगा. उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस का लोकतंत्र में निम्न स्तर का आचरण है, जो उसकी मानसिकता का दिखाता है कि वो अपनी सब बात कहते हैं लेकिन दूसरे की बात नहीं सुनना चाहते. उनके सांसद अपनी बात पूरी तरह से कहते हैं और हम सब उनकी बात सुनते हैं लेकिन जब हमारी ओर से उत्तर दिया जाता है तो हल्ला करके वॉकआउट कर देते हैं. उनमें सुनने की क्षमता नहीं है. यह लोकतंत्र के लिए हानिकारक है.



