Shankaracharya Controversy: उत्तराखंड के ज्योतिर्मठ के प्रमुख स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने 28 जनवरी को माघ मेले से वापस लौट चुके हैं. वापस लौटने से पहले मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा था कि उन्हें दुख मन से माघ मेले से बिना स्नान किए वापस लौटना पड़ रहा है. उन्होंने दावा किया कि इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है कि कोई शंकराचार्य बिना स्नान किए मेला छोड़ कर गए हों. वहीं आज गुरुवार को वाराणसी में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि प्रयागराज में जो लाठी चलाई गई, वह उन पर चलाई गई जो सनातन को समझने के लिए गुरुकुल में भर्ती हुए. सन्यासियों पर, ब्रह्मचारियों पर, साध्वियों पर, संतों पर, बुजुर्गों पर, यह सब तो सनातन धर्म का अंग है. इन पर लाठियां चलने के बाद जिस संत को पीड़ा नहीं हो रही, वह संत नहीं, ढोंगी है. संत का वेश धारण करके संतों के बीच घुसा हुआ है.
“ब्राह्मण बच्चों को भी नहीं छोड़ना चाहते हैं”
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने आगे कहा कि ब्राह्मण विरोधी का जो टैग लग रहा था, यह समझिए उसका सर्टिफिकेट निकल कर आ गया. उन्होंने इस घटना के बाद किसी अधिकारी पर कोई कार्रवाई नहीं की. उससे पक्का हो गया कि वो अब ब्राह्मणों को नहीं उनके बच्चों को भी नहीं छोड़ना चाहते हैं. पहले किसी पर आक्रमण होता था, तो महिलाओं-बच्चों को छोड़ दिया जाता था. अब वह ब्राह्मण बच्चों को भी नहीं छोड़ना चाहते हैं. उनका आचरण यही सिद्ध कर रहा है. उन्होंने कहा कि “माफी मांगना या न मांगना, अपने अपराध को अपराध समझना या न समझना, अपनी गलती को गलती मानना या न मानना. यह सब उनके ऊपर निर्भर करता है. उन्होंने जो अपराध किया है, वह आप लोगों के माध्यम से सबके सामने रखा जा चुका है. इसके बाद भी अगर वे अहंकार दिखाते हैं, तो यह बात जनता देख रही है. हमने तो संयम के साथ 11 दिन तक वहां बैठकर पूरा अवसर दिया कि उनसे अपराध हुआ है, तो वे उसे सुधार सकते हैं. उन्होंने नहीं सुधारा, तो अब यह बात जनता के सामने आ चुकी है.
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“अपने देश में तानाशाही काबिज़ हो चुकी है”
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि बात यह है कि माफी तो कभी भी मांगी जा सकती है. लेकिन मौका तो वहीं पर था. अब तो माघ मेला भी पूरा होने वाला है. हम लोग अब वहां से निकल कर आ ही गए. आसन एक बार उखड़ ही गया. पूरे देश में वीडियो लोगों ने देख लिया, किस तरह से लोगों को मारा-पीटा जा रहा है, बटुकों को उनकी चोटी पकड़ करके उनको अपमानित किया जा रहा है. उसके बाद भी किसी एक के ऊपर कोई एक छोटी सी भी कार्रवाई प्रदेश सरकार की नहीं हुई. इससे पता चलता है कि वह जो चाहेंगे करेंगे. किसी को कुछ बोलने का अब अधिकार नहीं रहा है. अपने देश में तानाशाही काबिज़ हो चुकी है. इस पार्टी की सरकार में अब कोई न्याय की आशा न करे.
“जनता के मन में भ्रम की स्थिति रहे, यह अच्छा नहीं है”
वहीं महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के विमान हादसे को लेकर विपक्ष द्वारा साज़िश की आशंका जताए जाने पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि बात ये है, किसी के मन में कोई शंका है, तो वो उठा ही सकता है साजिश है या नहीं है इसका निर्णय सही जांच करवाकर कर देना चाहिए. हमारे ख्याल से यह स्पष्ट कर ही देना चाहिए क्योंकि जनता के मन में कोई भ्रम की स्थिति रहे, यह अच्छा नहीं है.



