Supreme Court On UGC New Guidelines: देशभर में जनरल कैटेगरी के स्टूडेंट्स और सवर्ण जाति के लोगों का यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन(UGC) के नए नियमों को लेकर विरोध जारी था. इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में 12 पिटीशन्स फाइल की गई थी. जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने आज गुरुवार को सुनवाई की और UGC के नए नियमों पर रोक लगा दी. सुप्रीम कोर्ट ने 23 जनवरी 2026 को अधिसूचित विश्वविद्यालय अनुदान आयोग विनियम पर रोक लगा दी, जिसे विभिन्न याचिकाकर्ताओं ने मनमाना बहिष्करणकारी, भेदभावपूर्ण और संविधान के साथ-साथ विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम 1956 का उल्लंघन बताते हुए चुनौती दी थी.
नियम समानता के सिद्धांत के खिलाफ
सुप्रीम कोर्ट यह फैसला उन लोगों के लिए राहत की खबर है जिन्होंने इन नए नियमों को चुनौती दी थी. याचिकाकर्ताओं का कहना था कि ये नियम समानता के सिद्धांत के खिलाफ हैं और कुछ समूहों को बाहर कर सकते हैं. उन्होंने यह भी तर्क दिया कि ये नियम यूजीसी एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन करते हैं. सुप्रीम कोर्ट के इस कदम से फिलहाल इन नियमों को लागू होने से रोक दिया गया है. अब इस मामले पर आगे सुनवाई होगी और कोर्ट तय करेगा कि ये नियम मान्य हैं या नहीं.
2012 के नियम फिर से लागू होंगे
चीफ जस्टिस ने आदेश देते हुए कहा कि 2012 के नियम फिर से लागू होंगे. कोर्ट ने कहा कि रेगुलेशन में जो शब्द इस्तेमाल किए गए हैं. उनसे यह लगता है कि इस रेगुलेशन का दुरुपयोग किया जा सकता है. जस्टिस बागची ने कहा कि हम समाज में एक निष्पक्ष और समावेशी माहौल बनाने पर विचार कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि जब 3E पहले से मौजूद है, तो 2C कैसे प्रासंगिक हो जाता है?
SC की तीखी टिप्पणी
याचिकाकर्ता के वकील विष्णु शंकर जैन ने सुनवाई के दौरान कहा कि वो हम यूजीसी एक्ट की धारा 3 (C) को चुनौती दे रहे हैं और ये असंवैधानिक है. सुनवाई के दौरान जहां चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि आजादी के 75 साल बाद भी देश जातियों के जंजाल से नहीं निकल पाया है तो वहीं जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने अमेरिका वाली स्थिति का जिक्र कर दिया. बागची ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि हम उस स्थिति तक नहीं पहुंचेंगे जहां अमेरिका की तरह अलग-अलग स्कूल हों जहां कभी अश्वेत और श्वेत बच्चों को अलग-अलग स्कूलों में पढ़ना पड़ता था.



