Badrinath–Kedarnath: बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता हेमंत द्विवेदी ने बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि बद्रीनाथ और केदारनाथ मंदिरों साहित BKTC के अधीनस्थ मंदिरों में ग़ैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित किए जाने को लेकर योजना बनाई जा रही है. इस संबंध में प्रस्ताव जल्द ही बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) की आगामी बोर्ड बैठक में लाकर पारित किए जाने की तैयारी है. केदारखंड से लेकर मानसखंड तक निर्मित मंदिरों की श्रृंखला में परम्परागत रूप से ग़ैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित रहा है, लेकिन पूर्व की गैर-भाजपा सरकारों के कार्यकाल में इस परम्परा का उल्लंघन किया गया. अब एक बार फिर सनातन परम्पराओं, आस्थाओं और धार्मिक मर्यादाओं की रक्षा के लिए ठोस पहल होती दिख रही है.
“इन जगहों का बहुत ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व है”
वहीं इस मामले पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हमने पहले ही कहा है कि, क्योंकि ये सभी धार्मिक स्थल हमारे प्राचीन पूजा स्थल हैं, इसलिए इन जगहों पर आने वाले और इनका मैनेजमेंट करने वाले लोगों, जिसमें हमारे धार्मिक संगठनों के सदस्य, तीर्थयात्रा समितियां, गंगा सभा, केदार सभा, बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति, हमारे पूजनीय संत समुदाय और इन स्थलों के मैनेजमेंट में शामिल सभी लोग शामिल हैं, उनके विचारों और राय पर विचार किया जाएगा. इन जगहों का बहुत ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व है, और अतीत में इनके संबंध में कुछ कानून बनाए गए थे. हम उन कानूनों की भी समीक्षा कर रहे हैं और उसी के आधार पर आगे बढ़ेंगे.
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“यदि मंदिर में आता है तो आस्था के लिए आता है”
गंगोत्री धाम विवाद पर उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि भाजपा की सरकारों को ये बताना चाहिए कि कोई भी यदि मंदिर में आता है तो आस्था के लिए आता है. क्या वे इतने संकीर्ण हो गए हैं कि हमारे धर्म के प्रचार-प्रसार की संभावनाओं को संकुचित करना चाहते हैं? यदि गैर हिंदू लोगों के वहां जाने पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है तो क्या इन धार्मिक स्थलों को सुरक्षित रखने में क्या सरकार सक्षम नहीं है? आज तक ऐसी आवश्यकता नहीं आई. वे इस प्रकार की बातों को फैलाकर राजनीतिक एजेंडा पूर्ण कर रहे हैं.



