Ram Mandir Pran Pratishtha Diwas : साल 2024 में आज ही के दिन यानि 22 जनवरी को अयोध्या के राम मंदिर में रामलला की प्रतिमा में प्राण प्रतिष्ठा की गई थी. आज राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के 2 साल पूरे हो गए हैं. इन 2 सालों में मंदिर में लगातार निर्माण हो रहे हैं और आस्था के इस केंद्र का नया स्वरूप सामने आ रहा है. रामलला के दर्शन के लिए रोजाना देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं. श्रद्धालुओं की सहूलियत को देखते हुए मंदिर के दर्शन की व्यवस्था से लेकर टाइमिंग में भी कई बदलाव किए गए हैं. अयोध्या के राम मंदिर का मुख्य ढांचा लगभग पूरी तरह तैयार हो चुका है. गर्भगृह में श्रीराम के बाल स्वरूप रामलला की मूर्ति की नियमित रूप से पूजा-अर्चना होती है.
मंदिर में एक चौड़ा परिक्रमा पथ बनाया गया
मंदिर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए एक चौड़ा परिक्रमा पथ बनाया गया है. इसके अलावा परिसर में बैठने की व्यवस्था, शौचालय, पेयजल और प्राथमिक चिकित्सा जैसी सुविधाओं का भी विस्तार किया गया है. इसके साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था को भी आधुनिक तकनीक से मजबूत किया गया है. बीते साल 2025 नवंबर में राम मंदिर पर धर्म ध्वजारोहण किया गया. केसरिया रंग के इस ध्वज की लंबाई 22 फीट चौड़ाई 11फीट और ध्वजदंड 42 फीट का है. इस ध्वज को 161 फीट के शिखर पर फहराया गया है. इस ध्वज पर तीन चिन्ह चिह्रित किए गए हैं- जो सूर्य, ऊं और कोविदार वृक्ष है.

कई मंदिर भी बनकर तैयार
वहीं मुख्य राम मंदिर में गर्भगृह और रंग मंडप का निर्माण पूरा हो चुका है. मुख्य मंदिर के चारों और 800 मीटर लंबा परकोटा बनकर तैयार है. इसमें कई छोटे मंदिर भी शामिल है. सप्त मंडप में महर्षि वाल्मिकी, वशिष्ठ, विश्वामित्र, अगस्त्य, निषादराज, शबरी और ऋषि पत्नी अहल्या के मंदिर बनकर तैयार हैं. छोटे मंदिर गणेश, भगवान शिव, हनुमान, सूर्यदेव, मां दुर्गा और अत्रपूर्णा के मंदिर भी पूर्व हो चुकी है.
यह भी पढ़ें: शहजाद पूनावाला का कांग्रेस पर निशाना, कहा- सौ चूहे खाकर, बिल्ली हज को चली..
संग्रहालय और प्रदर्शनी स्थल होंगे विकसित
वहीं दूसरी ओर अयोध्या राम मंदिर परिसर में राम कथा को समझाने के लिए संग्रहालय और प्रदर्शनी स्थल विकसित किए जा रहे हैं. यहां आने वाले श्रद्धालुओं को भगवान राम के जीवन से लेकर, वनवास, राम-रावण युद्ध और रामराज्य की अवधारणा को चित्रों, शिल्प और आधुनिक माध्यमों से समझाया जाएगा. ताकि रामायण को दृश्य रूप और सरल भाषा में समझाया जा सके.

बता दें कि जन्मभूमि पर राम मंदिर के निर्माण का काम 15 जनवरी 2021 को शुरू हुआ था. 5 अगस्त 2020 को पीएम नरेंद्र मोदी ने भूमि पूजन किया था. जनवरी 2021 में मंदिर निर्माण के लिए श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने नींव की खुदाई शुरू कराई थी. कुल मिलाकर 2 साल बाद श्रीराम मंदिर अपनी भव्यता और गरिमा के साथ खड़ा है. अभी कुछएक काम बाकी हैं. लेकिन अयोध्या का राम मंदिर अब पूरे की आस्था का केंद्र बन चुका है.



