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बसंत पंचमी पर शुभ संयोग, मां सरस्वती की पूजा से बरसेगी कृपा, जीवन में बदलाव संभव

Basant Panchami

Basant Panchmi : इस साल बसंत पंचमी पर शुभ संयोग बन रहा है। माना जा रहा है कि इस दिन यदि मां सरस्वती की पूजा की जाएगी तो सरस्वती अपनी कृपा बरसाएगी जिससे जीवन में बदलाव संभव है। मान्यता है कि बसंत पंचमी के पावन अवसर पर ही माता सरस्वती का प्राकट्य हुआ था, इसलिए इस दिन उनका पूजन अत्यंत फलदायी माना जाता है. हर वर्ष बसंत पंचमी माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है. कहा जाता है कि यदि इस शुभ दिन पर केवल मां सरस्वती के नामों का स्मरण और श्रद्धापूर्वक पूजा की जाए, तो देवी शीघ्र प्रसन्न होकर अपने भक्तों पर कृपा बरसाती हैं. इससे जीवन में सौभाग्य की वृद्धि, सोच में सकारात्मक बदलाव, कला और ज्ञान में निखार तथा सद्बुद्धि की प्राप्ति होती है.

 विशेष धार्मिक महत्व

हिंदू सनातन परंपरा में प्रत्येक तिथि और प्रत्येक वार का अपना विशेष धार्मिक महत्व माना गया है. इसी क्रम में माघ मास को भी अत्यंत पुण्यदायी और शुभ फल देने वाला महीना कहा गया है. माघ महीने की शुरुआत के साथ ही कई प्रमुख धार्मिक पर्वों का आगमन होता है, जिनमें बसंत पंचमी का पर्व विशेष स्थान रखता है. इस दिन विद्या, बुद्धि और कला की अधिष्ठात्री देवी माता सरस्वती की विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है.

कब मनाई जाएगी बसंत पंचमी?

हिंदू पंचांग के अनुसार माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 23 जनवरी 2026 को अर्धरात्रि 2 बजकर 28 मिनट पर शुरू होगी. वहीं इसका समापन 24 जनवरी को अर्धरात्रि 1 बजकर 46 मिनट पर होगा. उदया तिथि के अनुसार, 23 जनवरी 2026 को बसंत पंचमी का पर्व मनाया जाएगा.

सरस्वती पूजन के 3 खास मुहूर्त

पूजा के शुभ मुहूर्त की बात करें, तो पूजा का पहला शुभ समय सुबह 07: 13 बजे से दोपहर 12: 33 बजे तक रहेगा. वहीं, अगर दूसरे शुभ मुहूर्त की बात करें तो अभिजीत दोपहर 12 बजकर 11 मिनट से 12 बजकर 54 मिनट कर रहने वाला है और आखिरी तीसरा मुहूर्त अमृतकाल सुबह 9 बजकर 31 मिनट से 11: 05 तक रहेगा.

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बसंत पंचमी विद्यार्थियों के लिए खास?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बसंत पंचमी के दिन ही भगवान ब्रह्मा के मुख से देवी सरस्वती का प्राकट्य हुआ था. इसी कारण यह दिन शिक्षा के आरंभ और ‘अक्षर अभ्यास’ के लिए सबसे श्रेष्ठ और शुभ माना जाता है. इस पावन अवसर पर विद्यार्थी विशेष रूप से अपनी पुस्तकों, लेखन सामग्री और वाद्य यंत्रों की पूजा करते हैं. मान्यता है कि ऐसा करने से मां सरस्वती प्रसन्न होती हैं और साधकों को तीव्र बुद्धि, विद्या, एकाग्रता और ज्ञान का वरदान प्रदान करती हैं. इससे पढ़ाई में सफलता और बौद्धिक विकास का मार्ग प्राप्त होता है.

बसंत पंचमी पर शुभ योग्य का निर्माण

बसंत पंचमी पर पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र बना रहेगा, जो दोपहर 2 बजकर 32 मिनट तक रहेगा. इसके बाद उत्तराभाद्रपद नक्षत्र का योग रहेगा. इस दिन परिध और शिव योग का साया भी बना हुआ है. ज्योतिषियों के मुताबिक, मकर में सूर्य, बुध, मंगल और शुक्र विराजमान हैं. इन ग्रहों की युति से चतुर्ग्रही योग का निर्माण हो रहा है. ऐसे में बसंत पंचमी पर इसका शुभ प्रभाव भी बना रहेगा.

 

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