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नितिन नबीन बने सबसे कम उम्र के BJP अध्यक्ष, नड्डा का सक्सेस रेट बरकरार रखना सबसे बड़ा चैलेंज

Nitin Nabin

BJP National President: नितिन नबीन ने आज(20 जनवरी) भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पदभार संभाल लिया है. बीजेपी हेडक्वार्टर में उन्होंने पदभार संभाला है. कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह समेत पार्टी के तमाम बड़े नेता मौजूद रहे. बीजेपी शासित प्रदेशों के सीएम भी इस कार्यक्रम का हिस्सा रहे. बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नबीन को किन-किन चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा. उसके बारे हम आपको डिटेल से बताते हैं.

आगामी विधानसभा चुनाव
साल 2026 में पश्चिमी बंगाल, असम, तमिलनाडू, केरल और पुडुचेरी जैसे राज्यों में चुनाव होने हैं. असम में बीजेपी की सत्ता बरकरार रखना चुनौतीपूर्ण होगा. बंगाल में ममता बनर्जी से टक्कर लेना भी लोहे के चने चबाना जैसा है. वहीं दक्षिण भारत में बीजेपी की पैठ कमजोर है. अभी तक पार्टी केवल कर्नाटक में ही मजबूत स्थिति में है. तमिलनाडू में नबीन ने हाल ही में 90 दिनों का बूथ-स्तरीय अभियान शुरू करने का आह्रान किया, जहां वे डीएमके पर भ्रष्टाचार, वंशवाद और शासन विफलता का आरोप लगा रहे हैं. केरल में पुडुचेरी में भी पार्टी को मजबूत करने का काम के लिए ग्रास रूट पर काम करना होगा. पूर्वोत्तर में असम के अलावा अन्य प्रदेशों में गठबंधन संतुलन बनाए रखने के लिए दूर दृष्टि की जरूरत होगी. 2026 के चुनावों में बीजेपी को जीत दिलाना नितिन नबीन की पहली अग्नि परीक्षा होगी.

बात करें बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की तो वे 6 साल तक पार्टी अध्यक्ष रहे हैं. उनके नेतृत्व में 32 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चुनाव हुए हैं. इनमें से 21 चुनावों में बीजेपी-एनडीए को जीत मिली है. उनका सक्सेस रेट 66 प्रतिशत रहा है. केंद्र में दस साल की सत्ता के बाद भी उनकी लीडरशिप में बीजेपी सरकार बनी रही. ऐसे में नितिन नबीन के सामने नड्डा के परफॉर्मेंस की तरह ही अपना प्रदर्शन बनाए रखने का दबाव होगा.

यह भी पढ़ें: “अब खत्म हुआ अटल-अडवाणी का युग…” नितिन नबीन के BJP अध्यक्ष बनने पर बोले कांग्रेस सांसद

पार्टी की अंदरूनी राजनीति से जूझना
नितिन नबीन नॉन-कंट्रोवर्शियल और एक्जीक्यूशन फोकस्ड नेता माने जाते हैं, जो फ्रेक्शनल राजनीति से दूर रहते हैं. शिवराज सिंह चौहान, मनोहर लाल खट्टर और धर्मेद्र प्रधान जैसे बड़े नाम अध्यक्ष पद की दावेदारी में थे. नितिन नबीन इन नेताओं से जूनियर है. ऐसे में नितिन नबीन के पार्टी अध्यक्ष बनने से वरिष्ठ नेताओं के बीच अंसतोष उभर सकता है. क्षेत्रीय स्तर पर भी गुटबाजी है. यूपी में योगी-शाह का डायनामिक्स, बिहार में नीतीश के साथ गठबंधन और दक्षिण में कमजोर इकाइयों में स्थानीय नेताओं के बीच अंसतोष. यदि नितिन नबीन वरिष्ठों को सम्मान देते हुए युवाओं को आगे लाते है तो पार्टी मजबूत होगी.

वन नेशन वन इलेक्शन
वन नेशन वन इलेक्शन दिसंबर 2024 में पेश संविधान संशोधन विधेयक यदि लागू हुआ तो सभी चुनाव एक साथ होंगे. जिससे रणनीति पूरी तरह बदल जाएगी. अलग-अलग चुनावों में मिलने वाला समीक्षा समय खत्म हो जाएगा. 2029 तक इसके प्रभाव की तैयारी जरूरी है. नितिन नबीन को इस बड़े बदलाव के साथ तैयार रहना होगा. एक साथ चुनाव के लिए संसाधन, प्रबंधन, अभियान और गठबंधन की रणनीति सब कुछ बदलना होगा.

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